अशोकनगर जिला अस्पताल में सिविल सर्जन भूपेंद्र शेखावत पर नर्सिंग स्टाफ लक्ष्मी जयसवाल से एप्रन उतरवाने का आरोप लगा। इस मामले को लेकर नर्सिंग स्टाफ ने अपर कलेक्टर से शिकायत की। बातचीत के दौरान विवाद बढ़ गया और नर्सिंग स्टाफ ने सिविल सर्जन और सीएमएचओ डॉ. अलका त्रिवेदी पर छुट्टी देने के बदले पैसे मांगने और रिकॉर्ड खराब करने की धमकी देने जैसे गंभीर आरोप लगाए। हालांकि मामले में सीएमएचओ और सिविल सर्जन ने आरोपों को खारिज किया है। घटना शुक्रवार दोपहर करीब 3 बजे की है। उस समय कलेक्ट्रेट कार्यालय खुले हुए थे। सिविल सर्जन भूपेंद्र शेखावत और सीएमएचओ डॉ. अलका त्रिवेदी अपनी-अपनी गाड़ियों से कलेक्ट्रेट पहुंचे। दोनों मुख्य गेट पर उतरकर अंदर गए और करीब 5 मिनट बाद वापस लौटकर सिविल सर्जन की गाड़ी में बैठकर निकल गए। कुछ ही देर बाद दो ऑटो कलेक्ट्रेट के मुख्य गेट पर रुके, जिनमें नर्सिंग स्टाफ मौजूद था। एक दर्जन से अधिक नर्सिंग स्टाफ ऑटो से उतरकर पैदल कलेक्ट्रेट की ओर बढ़ीं। मुख्य गेट बंद होने के कारण वे पोस्ट ऑफिस के पास वाले गेट से दूसरी मंजिल पर पहुंचीं और सीधे अपर कलेक्टर के कार्यालय गईं। दोबारा पहुंचे सिविल सर्जन और सीएमएचओ, बाहर हुई बातचीत नर्सिंग स्टाफ के पहुंचने के कुछ ही समय बाद सिविल सर्जन और सीएमएचओ भी दोबारा कलेक्ट्रेट पहुंचे और सीधे दूसरी मंजिल पर अपर कलेक्टर के कार्यालय पहुंचे। वहां लगभग 5 मिनट तक नर्सिंग स्टाफ से चर्चा हुई, लेकिन सहमति नहीं बनी। इसके बाद बाहर आकर बात करने को कहा गया। नर्सिंग स्टाफ का आरोप है कि बाहर सभी के सामने उनसे बातचीत की गई, जहां उन्होंने अपने आरोप खुलकर रखे। नर्सिंग ऑफिसर का आरोप- छुट्टी के बदले मांगे पैसे नर्सिंग ऑफिसर दिव्या तिवारी ने कहा कि मैं सीसीएल के लिए कई बार आवेदन दे चुकी थी, लेकिन सिविल सर्जन और सीएमएचओ द्वारा आवेदन रिजेक्ट कर वापस भेज दिया जाता था। मैं सीएमएचओ मैडम के पास पहुंची और कहा कि मेरा बच्चा छोटा है, परिवार में उसका ख्याल रखने वाला कोई नहीं है। मैडम ने कहा छुट्टी ऐसे नहीं मिलेगी और पैसों का इशारा किया। दिव्या तिवारी के बताया कि उस वक्त मेरे पास ₹5000 थे। मैंने एप्लीकेशन के साथ मैडम के सामने ₹5000 रख दिए, लेकिन मैडम को पैसे कम लगे। उन्होंने फोन करवाया और कहा कि तुम ये पैसे यहां से उठा कर ले जाओ। मैं वापस गई और पैसे ले आई। उन्होंने बताया कि पहले दो महीने की सीसीएल सैंक्शन की गई थी, लेकिन पैसे वापस लाने के बाद एक महीने की सीसीएल कैंसिल कर दी गई। लेटर में लिखा गया कि स्टाफ की कमी के चलते आपकी सीसीएल कैंसिल की जाती है। आप एक महीना पूरा होने के बाद ड्यूटी ज्वाइन करें। ‘पैसे देने के बाद ही छुट्टियां मिलती हैं’ दिव्या तिवारी ने कहा कि सीएमएचओ कहती हैं कि यह आरोप मेरे ऊपर लगाए जा रहे हैं, जबकि यहां और भी लोग मौजूद हैं। सभी की छुट्टियां पैसे देने के बाद ही स्वीकृत की जाती हैं। जिला अस्पताल में ऐसी नर्सिंग स्टाफ हैं जिनके 6 महीने के बच्चे हैं, फिर भी उन्हें छुट्टी नहीं दी जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि अगर कोई आवाज उठाता है तो उसे टारगेट किया जाता है। खुद मुझे सिविल सर्जन ने कई बार चेतावनी दी है कि आपका रिकॉर्ड खराब कर दिया जाएगा। कहा जाता है कि आपने छुट्टियां ज्यादा ली हैं। दिव्या तिवारी ने कहा कि अगर मेरे रिकॉर्ड में कुछ भी होता है तो उसकी जिम्मेदारी सीएमएचओ और सिविल सर्जन की ही होगी। जो मेरे साथ गलत हुआ, उसके खिलाफ आवाज उठाई है। अगर हम नहीं बोलेंगे तो ऐसा ही होता रहेगा। पुरुष स्टाफ के सामने एप्रन उतरवाने पर आपत्ति दिव्या तिवारी ने कहा कि सिविल सर्जन ने चिकन पॉक्स दिखाने के लिए एक नर्सिंग ऑफिसर को एप्रन उतरने को कहा। वहां मौजूद स्टाफ में सभी पुरुष थे। महिला से कपड़ा उतरवाने की बात सभी को बुरी लगी। उन्होंने आगे कहा कि अगर इस बात की आवाज उठाने पर हमें गलत ठहराया जा रहा है तो कोई बात नहीं। दूसरी नर्सिंग ऑफिसर का आरोप- सैंक्शन के लिए मांगे पैसे दूसरी नर्सिंग ऑफिसर शिवानी ने भी आरोप लगाया कि सिविल सर्जन द्वारा एक सैंक्शन के लिए पैसों की मांग की गई थी। उन्होंने कहा कि उन्होंने यह नहीं बताया था कि कितने रुपए देने हैं। मैंने पैसे नहीं दिए। इसके बाद केवल एक सप्ताह की सैंक्शन हुई। सीएमएचओ का जवाब- आरोप झूठे हैं इन आरोपों पर सीएमएचओ डॉ. अलका त्रिवेदी ने कहा कि दिव्या अपने पति के साथ छुट्टी का आवेदन लेकर मेरे घर आई थीं और पैसे रखकर चली गई थीं, लेकिन मैंने पैसे तुरंत वापस कर दिए थे। सीएमएचओ ने नर्सिंग स्टाफ द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को झूठा बताया। सिविल सर्जन का स्पष्टीकरण- आस्तीन ऊपर न होने पर कहा था सिविल सर्जन भूपेंद्र शेखावत ने एप्रन उतरवाने के आरोप पर सफाई दी। उन्होंने कहा कि नर्सिंग स्टाफ ने स्वेटर पहन रखा था, जिससे आस्तीन ऊपर नहीं जा रही थी। इसलिए एप्रन उतारने को कहा था। उन्होंने कहा कि शायद उन्हें लगा कि कुछ गलत हुआ है और उन्हें बुरा लगा। उस समय वहां अन्य स्टाफ सदस्य भी मौजूद थे। कांग्रेस का विरोध, कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन की चेतावनी इस पूरे मामले के विरोध में कांग्रेस ने भी प्रदर्शन किया है। शनिवार दोपहर कलेक्ट्रेट कार्यालय के गेट पर धरना दिया जा रहा है। कांग्रेस पदाधिकारियों ने कहा कि सीएमएचओ डॉ. अलका त्रिवेदी और सिविल सर्जन भूपेंद्र शेखावत पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि अगर प्रशासन ने कार्रवाई नहीं की तो धरना-प्रदर्शन, रैली और उग्र आंदोलन किया जाएगा।


