मेवात के जंगल और पहाड़ों में ठगी की कोचिंग:ठग बच्चों को खेतों में देते हैं ट्रेनिंग, फिर उपलब्ध कराते हैं फर्जी सिम व बार कोड

जिले के मेवात में 13 से 16 साल तक के बच्चे जो कक्षा 5 से लेकर नौवीं तक पढ़ रहे हैं वे वेबसाइट हैकिंग और एप से टैक्सी ड्राइवर सहित पढ़े लिखे लोगों को ठगी का शिकार बना रहे हैं। यह बच्चे विद्यालय जाने की बजाय गांव के पहाड़ व जंगल में एंड्राइड मोबाइल का उपयोग करते हुए देखे जा सकते हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि मेवात के ज्यादातर नाबालिग बच्चे लखपति और करोड़पति हैं। चार नाबालिग जिन्हें हाल ही में पुलिस ने निरुद्ध किया है। इन बच्चों ने बड़ा खुलासा करते हुए बताया है कि कैसे इनको ठगी के कारोबार में शामिल किया है। नाबालिग बच्चों को गांव-गांव जाकर ठगी के लिए कोचिंग देते हुए बड़े-बड़े सपने दिखाकर ठगी के कारोबार में लाने के लिए प्रेरित करने में साबिर पुत्र मुवीन निवासी खेड़ली गुमानी की मुख्य भूमिका बताई है। जो बच्चों को एमपी से सिम उपलब्ध कराकर ठगी के लिए ट्रेंड करता है। आजीब पुत्र हजरत निवासी खेरली गुमानी बच्चों के ट्रेंड होने के बाद उनको खातों का बारकोड उपलब्ध कराता है। खाते में पैसे आने के बाद शुरुआत में 10 प्रतिशत राशि काटने के बाद 90% राशि बच्चों को उपलब्ध करा देता है। जिससे वह अपने बड़े-बड़े शौक पूरे करते हैं। साबिर और आजीब दोनों के द्वारा मेवात में करीब 2 वर्ष से बच्चों को ठगी के काम की ट्रेनिंग देने की बात सामने आई है जिसमें 1000 के करीब बच्चे ठगी के लिए ट्रेंड कर दिए हैं। टैक्सी ड्राइवरों से ऐसे करते हैं ठगी नाबालिग ठग ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर गाड़ी बुक करते हैं और फिर मुंबई की लोकेशन डालते हैं। जब गाड़ी आती है, तो कैंसिल कर बोलते हैं कि आपका जो खर्चा है उसका ऑनलाइन पेमेंट कर देंगे। गाड़ी ड्राइवर 200 रुपए खर्चा बताता है। इसके बाद ठग एक फर्जी टेक्स्ट मैसेज भेजते हैं जिसमें 2000 रुपए गलती से डालना बताता है। फिर, वे गाड़ी वाले से कहते हैं कि उन्हें ₹1800 अपने बारकोड पर डलवाने होंगे। नाबालिगों ने ठगी के कारण स्कूल जाना भी छोड़ा केस.1- मेवात का 15 वर्षीय राहुल (बदला हुआ नाम) कक्षा 8 तक पढ़ाई में बहुत ही अच्छा था। नवमी कक्षा में आने के बाद साबिर के संपर्क में आ गया। ठगी में ट्रेंड होकर अपने छोटे भाई को भी ठगी के काम में शामिल कर लिया दोनों भाई मिलकर अन्य गांव के लोगों के साथ गैंग बनाकर ठगी करने लग गए जिस दिन से ठगी में शामिल हुआ उसे दिन से विद्यालय जाना भी छोड़ दिया। लेकिन फर्जी खातों में लाखों रुपए मौजूद हैं। केस.2- मेवात के 13 वर्षीय राजू बदला हुआ नाम जो निजी विद्यालय में 9वीं कक्षा में अध्ययन करता है। ठगी में अपने बड़े भाई को देखकर साबिर से ट्रेनिंग लेकर ठगी करने लग गया। ठगी के लिए फर्जी से साबिर ने उपलब्ध कराई तथा बारकोड आजीब ने दिया था। ठगी की 10 परसेंट राशि काटकर अजीब से पहली रकम प्राप्त होने के बाद साबिर को ₹1000 सिम के उपलब्ध कराए गए। अब बड़े-बड़े इंजीनियरों को भी मात दे रहा है। केस.-3- मेवात का 14 वर्षीय आरिफ बदला हुआ नाम कक्षा सातवीं में सरकारी विद्यालय में अध्ययन करता है। चाचा की जेल जाने के बाद जब चाचा की लड़की ठगी का काम करने लग गई। तो साबिर से ट्रेनिंग लेकर ठगी के कारोबार में उतर गया। केस.4- नासिर 15 वर्ष बदला हुआ नाम पास के ही गांव के नाबालिग बच्चों को बड़े-बड़े शौक मौज देखकर गैंग में शामिल हो कर ठगी करने लग गया। जुरहरा थानाधिकारी योगेंद्र सिंह ने बताया कि खेड़ली गुमानी में गैंग को पकड़ने के लिए पूरी टीम के साथ सर्च अभियान चलाया छः लोगों को पुलिस ने पकड़ लिया लेकिन तीनों नाबालिग बच्चे मौके से भाग जाने में सफल रहे। वहीं पांच दिन बाद इन चार बच्चों के निरूद्ध कर लिया। “ऑपरेशन एंटीवायरस साइबर ठगी को रोकने के साथ ही मेवात के हमारे बच्चों के भविष्य को बचाने और सवारने का भी अभियान है। इस अभियान का ऑपरेशन साइबर शील्ड के साथ और मज़बूती के साथ चलाया जा रहा है।”
-राहुल प्रकाश आईजी भरतपुर।

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