मैं एक मंजिला मकान में लिफ्ट लगवा दूंगा!:जनता को 5 साल तक बेवकूफ बनाने की क्या जरूरत है!

दिल्ली में चुनाव का हंगामा मचा हुआ है। अगर मैं चुनाव लड़ रहा होता, तो मैं अपने घोषणा पत्र में जनता के लिए ऐसी-ऐसी घोषणाएं करता कि सारे नेता टापते रह जाते! मैं बाकियों की तरह चुनावी रेवड़ियां हरगिज नहीं बांटता। इतने वर्ष में भी हमारे राजनीतिज्ञ रेवड़ियों से ऊपर नहीं उठ सके। देखकर मुझे शर्म आती है। मैं होता, तो रेवड़ी नहीं हलवा बांटता। भारतीय संस्कृति का प्रतीक शुद्ध देसी घी का हलवा। हद्द हो गई, चुनाव में दो सौ यूनिट बिजली मुफ्त देने की बातें चल रही हैं। ओछी बातें हैं ये। मेरे पास पॉवर आएगी तो मैं सबको पॉवर दूंगा। वो भी बिल्कुल मुफ्त। जनता की बिजली, जनता को देनी है, तो मीटर की क्या जरूरत। मैं यह अंधेरगर्दी बंद करूंगा। मेरा नारा होगा, तुम मुझे पावर दो, मैं तुम्हें पावर दूंगा। मैं देश की महान जनता को इतनी सुविधाएं दूंगा कि अगर आपने एक मंजिला मकान भी बनाया तो मैं उसमें लिफ्ट लगवाकर दूंगा। जनता एक मंजिल तक चढ़ने में भी पसीना क्यों बहाए? वरना मेरे मुख्यमंत्री बनने का क्या लाभ! मुझे जो जिताएगा, मैं पूरे देश के संसाधन उसकी ओर मोड़ दूंगा। फिर कलकत्ता, मुम्बई वाले चाहे अनशन पर बैठ जाएं लेकिन मैं कलकत्ता से मुम्बई जाने वाली ट्रेन को भी दिल्ली से होकर निकालूंगा। ये है अपनी जनता की सेवा। मेरा मुकाबला ये राजनीति वाले कहां कर पाएंगे? ये जो काम वो 5 साल में करेंगे, वो मैं 5 दिन में कर दिखाऊंगा। जनता को 5 साल तक बेवकूफ बनाने की क्या जरूरत है। एक पार्टी कह रही है कि यमुना नदी के पानी में जहर मिला हुआ है। दूसरी पार्टी कह रही है कि प्रदूषण के कारण यमुना विषैली हुई है। मैं ऐसा झंझट ही खत्म कर दूंगा। मैं यमुना को दिल्ली से गुजरने ही नहीं दूंगा! नेता मुफ्त में अनाज बांट रहे हैं। पर मैं बाकायदा रोटी बनाकर आपके घर खिलाने आऊंगा। वो अनाज देंगे ये बेचारे तुमसे अनाज लेकर उसे पीसेंगे। फिर रोटी बनाएंगे। यह अत्याचार है। मैं तुम्हारे लिए सीधे रोटी लाऊंगा। तुम्हारे बर्तन साफ करूंगा। झाड़ू-पोंछा कर दूंगा। जो जनता मुझे जिताएगी, उसे भला मैं कोई काम कैसे करने दे सकता हूं। इस तरह मैं चुनाव जीत ही जाऊंगा। और जो लोग मुझसे हारेंगे, वे हार का एक ही कारण बताएंगे, कि हमारे वोटर वोटिंग के दिन कुंभ नहाने चले गए थे। मैं टीवी पर इंटरव्यू दूंगा कि ‘वोटर गंगा नहा लिए और नेता डूब गए।’ मैं हास्य का कवि हूं। उधर सारी राजनीतिक पार्टियां दिल्ली की जनता के साथ मजाक कर रही हैं। मैं मंच पर मजाक करता हूं, लेकिन जनता के साथ मजाक नहीं कर सकता। वास्तव में अगर मैं कुछ बना तो मैं आपको कुछ भी फोकट में नहीं दूंगा। मैं आपसे काम करवाऊंगा। दिन-रात काम करवाऊंगा और जब मेरी दिल्ली के चार करोड़ हाथ एक साथ मिलकर काम करेंगे तो लोगों को किसी के आगे हाथ नहीं फैलाने पड़ेंगे। मैं दिल्ली की जनता, देश की जनता से कहना चाहता हूं कि जितने भी लोग रेवड़ियां बांट रहे हैं, ये आपको अपंग बना रहे हैं। रेवड़ियों का चस्का लग गया तो आप इन पर निर्भर हो जाओगे। फिर देश में मांगने वालों की संख्या बढ़ेगी और कामगार समाप्त हो जाएंगे। ऐसे चुनावी घोषणापत्रों के झांसे में जनता आई तो हर चुनाव का एक ही परिणाम आएगा, ‘राजनीति जीत जाएगी और देश हार जाएगा।’ —————– ये कॉलम भी पढ़ें… बिस्किट लूटने के फेर में बर्बाद हुआ आयोजन!:मुझे गीता का सार समझ आ गया, ‘कर्म किए जा, फल की इच्छा मत कर’

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