छत्तीसगढ़ के शिमला कहे जाने वाले मैनपाट में बाक्साइट खदान का विरोध करते हुए ग्रामीणों ने रविवार को आयोजित पर्यावरणीय जनसुनवाई के लिए लगाए गए टेंट पंडाल को उखाड़ दिया। मैनपाट के कंडराजा एवं उरंगा में बाक्साइट खदान निजी कंपनी को आबंटित हुई है, जिसके लिए रविवार को पर्यावरणीय जनसुनवाई आयोजित थी। खदान का विरोध कर रहे जिला पंचायत सदस्य रतनी नाग सहित ग्रामीणों का दावा है कि खदान के कारण मैनपाट के पर्यावरण को नुकसान पहुंचेगा। जानकारी के मुताबिक, मैनपाट के ग्राम कंडराजा एवं उरंगा में बाक्साइट खदान निजी कंपनी मां1120. कुदरगढ़ी एलुमिना प्राइवेट लिमिटेड को आबंटित की गई है। खदान के लिए हुए आक्शन में सीएमडीसी सहित एक अन्य निजी कंपनी ने भाग लिया था। दोनों स्थानों की खदानें मां कुदरगढ़ी एलुमिना प्राइवेट लिमिटेड को आबंटित हुई है। कंडराजा में बाक्साइट उत्खनन के लिए लीज एवं अन्य प्रक्रिया पूरी हो गई है। जनसुनवाई के पहले हंगामा, उखाड़ा पंडाल
कंडराजा में 135.22 हेक्टेयर में बाक्साइट उत्खनन की मंजूरी के लिए रविवार को पर्यावरणीय जनसुनवाई नर्मदापुर के स्टेडियम ग्राउंड में आयोजित की गई है। जनसुनवाई के पहले जिला पंचायत सदस्य रतनी नाग के नेतृत्व में बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंचे और जनसुनवाई का विरोध करते हुए टेंट पंडाल को उखाड़ दिया। पुलिस ने हंगामा कर रहे ग्रामीणों को रोकने की कोशिश की। ग्रामीणों का आरोप है कि मैनपाट में नए खदान की स्वीकृति दिए जाने से पर्यावरण को खतरा है। जिस इलाके में बाक्साइट उत्खनन प्रस्तावित है, वह हाथी प्रभावित है। बाक्साइट उत्खनन हुआ तो हाथी आक्रामक हो सकते हैं। कंपनी ने लोगों को पिलाई शराब, ताकि विरोध न हो
जिला पंचायत सदस्य रतनी नाग ने आरोप लगाया है कि जनसुनवाई के पहले प्रभावित क्षेत्र के ग्रामीणों को कंपनी के लोगों ने पूरी रात जमकर शराब पिलाई, ताकि वे जनसुनवाई में कंपनी का विरोध न कर सकें। मैनपाट में खदानों के कारण पर्यावरण खराब हो रहा है। बाक्साइट परिवहन के कारण सड़कें प्रभावित हो रही हैं। इससे पर्यटन पर सीधा विपरीत प्रभाव पड़ेगा। खदानों ने बिगाड़ी खूबसूरती
मैनपाट में पहले बाक्साइट खदानें बाल्को को आबंटित थी, जिसके लिए बड़ी संख्या में पेड़ काटे गए। वर्तमान में सीएमडीसी की पथरई, केसरा, बरिमा, नर्मदापुर में बाक्साइट खदानें संचालित हैं जो निजी कंपनियों द्वारा चलाई जा रही हैं। विरोध करने वालों का आरोप है कि बाक्साइट उत्खनन से मैनपाट को सिर्फ विनाश मिला है। निजी कंपनियां मनमाने तरीके से उत्खनन करती हैं। इसमें स्थानीय लोगों को अब रोजगार भी नहीं मिल रहा है। कंपनियां लोगों का शोषण कर रही हैं। वाटर लेवल नीचे जा रहा है। जमीन अधिग्रहण नहीं, मिलेगा फसल क्षति का मुआवजा
बाक्साइट खदान के लिए पर्यावरणीय जनसुनवाई अंतिम प्रक्रिया है। इसके पहले जमीन के लीज का एग्रीमेंट हो चुका है। ग्रामसभा की अनुमति मिल चुकी है। बाक्साइट खदान खोलने के नए प्रावधानों के तहत लोगों की जमीनों का अधिग्रहण नहीं किया जा रहा है, बल्कि उन्हें फसल क्षति का मुआवजा देकर जमीनें निर्धारित अवधि के लिए लीज पर ली गई हैं। बाक्साइट का उत्खनन के बाद कंपनियां जमीनों को खेती योग्य बनाकर वापस करेंगी। जमीन का स्वामित्व भू-स्वामियों के पास ही रहेगा। फसल क्षतिपूर्ति की रकम मैनपाट में करीब 80 हजार रुपए प्रति हेक्टेयर प्रति वर्ष है। हंगामे के कारण सुरक्षा के कड़े इंतजाम
जनसुनवाई में हंगामे को देखते हुए प्रशासन ने पुलिस बल तैनात किया है। हंगामे के कारण पर्यावरणीय जनसुनवाई निर्धारित समय 11 बजे से प्रारंभ नहीं हो सका। जनसुनवाई के लिए प्रशासनिक अधिकारी सहित पर्यावरण विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंच गए हैं।


