मैहर के बहुचर्चित घंटाघर दंगा मामले में न्यायालय ने छह साल बाद बुधवार शाम कोर्ट ने फैसला सुनाया है। इसमें 14 आरोपियों को दोषी ठहराते हुए एक-एक साल के सश्रम कारावास और 6-6 हजार रुपए का अर्थदंड दिया गया है। घंटाघर चौराहे पर धार्मिक झंडा लगाने को लेकर हुआ था विवाद यह मामला 8 दिसंबर 2017 की रात करीब 8 बजे का है। मैहर के घंटाघर चौराहे पर धार्मिक झंडा लगाने को लेकर दो समुदायों के बीच विवाद हो गया। यह विवाद जल्द ही हिंसक झड़प में बदल गया था, जिसमें मारपीट और गंभीर हमले की घटनाएं हुई थीं। घटना के संबंध में फरियादी महेश प्रसाद तिवारी (34), निवासी वार्ड क्रमांक 09, मानपुर, मैहर ने कोतवाली थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उनकी रिपोर्ट के अनुसार, कुछ लोग आपत्तिजनक नारे लगा रहे थे। जब फरियादी मौके पर पहुंचे, तो आरोपियों ने उन्हें घेरकर हमला कर दिया। मुस्लिम समुदाय के युवकों पर मारपीट का आरोप फरियादी का आरोप है कि मोदी अंसारी ने बका से, वसीम खान ने रॉड से और सोहैल ने डंडे से हमला किया। अन्य आरोपियों ने भी हाथ-मुक्कों से मारपीट की। बीच-बचाव करने आए लोगों के साथ भी मारपीट की गई। इस हमले में फरियादी महेश प्रसाद तिवारी को सिर, कमर, कंधे, पीठ और हाथ में गंभीर चोटें आईं। घटना के बाद कोतवाली मैहर में मामला दर्ज किया गया था। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी। इस मामले की सुनवाई 23 जुलाई 2018 से न्यायालय में चल रही थी। लंबी सुनवाई के बाद न्यायाधीश शरद लटोरिया की अदालत ने सभी 14 आरोपियों को दोषी ठहराते हुए यह सजा सुनाई।


