सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय ने भारतीय शिक्षा के अंतरराष्ट्रीयकरण की पहल के तहत शुक्रवार को मॉरीशस के पूर्व राष्ट्रपति पृथ्वीराज सिंह रूपन को आमंत्रित कर सम्मानित किया। इस अवसर पर पृथ्वीराज सिंह रूपन ने कहा कि कृष्ण की विद्याभूमि पर आना उनका सौभाग्य है। यह कार्यक्रम विश्वविद्यालय के स्वर्ण जयंती सभागार में आयोजित किया गया, जिसकी अध्यक्षता कुलगुरु प्रो. अर्पण भारद्वाज ने की। पूर्व राष्ट्रपति के साथ सात सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल भी उपस्थित था। उन्हें महाकालेश्वर मंदिर के शिखर की प्रतिकृति युक्त प्रतीक चिन्ह, शॉल, सूत की माला और अंगवस्त्र अर्पित कर सम्मानित किया गया। सम्मान करने वालों में कुलगुरु प्रो. अर्पण भारद्वाज, प्रभारी कुलसचिव डॉ. डीके बग्गा, प्रो. शैलेंद्र कुमार शर्मा, डीएसडब्ल्यू प्रो. एसके मिश्रा, अवंतिका विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. मनीष पाटिल, प्रो. प्रिया राव, योग गुरु डॉ. मिलिंद त्रिपाठी और डॉ. कानिया मेड़ा शामिल थे। पूर्व राष्ट्रपति बोले-समग्र विकास पर ध्यान देने की जरूरत
पूर्व राष्ट्रपति रूपन ने वर्तमान में विद्यार्थियों के समग्र विकास पर ध्यान देने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान को आज विश्वस्तर पर प्रसारित करने का अवसर मिल रहा है। वेद, योग और आयुर्वेद के ज्ञान को मॉरीशस सहित दुनिया के अनेक देशों में महत्व दिया जा रहा है। छात्राओं ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं
सम्मान समारोह के अवसर पर विश्वविद्यालय की छात्राओं ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। हीना वासेन ने शिव आराधना और ‘पधारो म्हारे देश’ नृत्य प्रस्तुत किया, जबकि अंशिता नामदेव ने कृष्णभक्ति पर केंद्रित कथक नृत्य की प्रस्तुति दी। मान्या गढ़वाल ने राजस्थानी नृत्य, संस्कृति तिवारी ने संबलपुरी नृत्य और उन्मेषा गोस्वामी ने बिहू नृत्य से दर्शकों का मन मोहा। कार्यक्रम का शुभारंभ कुलगान के साथ हुआ और समापन राष्ट्रगान से किया गया। इस आयोजन में रवींद्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय भोपाल के कुलपति प्रो. विजय सिंह सहित विभिन्न विभागाध्यक्ष, शिक्षाविद्, गणमान्य नागरिक और विद्यार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन ईवैंजेलिन चौहान ने किया, जबकि आभार कुलानुशासक प्रो. शैलेंद्रकुमार शर्मा ने व्यक्त किया।


