जिला सेशन जज नीलम अरोड़ा की अदालत ने तीन साल पुराने हत्या और साक्ष्य मिटाने के मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने दोषी गुरतेज सिंह उर्फ कद्दू और उसके भाई छिंदा सिंह (पुत्र तोता सिंह) को उम्रकैद की सजा सुनाई है। साथ ही, दोनों दोषियों पर एक-एक लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है। जुर्माना अदा न करने की स्थिति में उन्हें एक-एक वर्ष की अतिरिक्त कैद काटनी होगी। यह मामला अप्रैल 2023 का है, जब मृतक रछपाल सिंह उर्फ साजन के पिता जगसीर सिंह ने थाना धर्मकोट में शिकायत दर्ज करवाई थी। आरोप के अनुसार, गुरतेज और छिंदा सिंह ने एक साजिश के तहत अपने परिवार की एक युवती से फोन करवाकर रछपाल को रात के समय अपने घर बुलाया था। रछपाल ने घर से निकलने से पहले अपने एक दोस्त को इस बात की जानकारी दी थी, लेकिन उसके बाद वह संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गया। परिजनों द्वारा तलाश शुरू करने पर जब रछपाल का कोई सुराग नहीं लगा, तो पुलिस को सूचित किया गया। छानबीन के दौरान पुलिस ने रछपाल सिंह का शव नजदीकी नहर से बरामद किया। प्राथमिक जांच और साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने दोनों भाइयों के खिलाफ हत्या और शव को खुर्द-बुर्द करने की धाराओं के तहत मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया था। मामले की सुनवाई के दौरान सरकारी वकील एडवोकेट कुलदीप साहनी ने पीड़ित पक्ष की ओर से प्रभावी पैरवी की। उन्होंने अदालत में पुख्ता गवाह और ठोस तकनीकी सबूत पेश किए, जिनसे यह साबित हुआ कि रछपाल की हत्या सुनियोजित साजिश का हिस्सा थी। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने आरोपियों को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई।


