पंजाब के मोगा में कस्टम्स अधिकारी बनकर एक व्यक्ति से 42.25 लाख रुपए की साइबर ठगी करने का मामला सामने आया है। इस मामले में पीड़ित मोगा निवासी दर्शन सिंह मिली की शिकायत पर थाना साइबर क्राइम मोगा पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस के अनुसार दर्शन सिंह को एक अनजान नंबर से फोन कॉल आई। कॉल करने वाले व्यक्ति ने खुद को कस्टम्स अधिकारी बताते हुए कहा कि उनके नाम का एक पार्सल हवाई अड्डे पर कस्टम्स विभाग द्वारा पकड़ा गया है। फोन पर दावा किया कि पार्सल में आपत्तिजनक सामग्री पाई गई है और यदि तुरंत कार्रवाई नहीं की गई तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है। डर और दबाव बनाकर आरोपियों ने दर्शन सिंह को विभिन्न बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया। पीड़ित ने अलग-अलग 17 बैंक खातों में कुल 42.25 लाख की राशि ट्रांसफर कर दी। बाद में खुद के साथ ठगी होने का आभास हुआ। केस दर्ज कर जांच में जुटी साइबर क्राइम पुलिस मामले की शिकायत मिलने के बाद थाना साइबर क्राइम ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है। पुलिस अब ठगी में इस्तेमाल किए गए डिजिटल फुट प्रिंट्स और बैंक खातों की जांच कर रही है। यह घटना पंजाब में बढ़ते साइबर अपराधों की गंभीर तस्वीर पेश करती है। यह मामला उस घटना के दो दिन बाद सामने आया है, जिसमें पूर्व पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) अमर सिंह चहल ने पटियाला में आत्महत्या का प्रयास किया था। 1990 बैच के आईपीएस अधिकारी अमर सिंह चहल को भी शेयर बाजार निवेश के नाम पर 8.10 करोड़ से अधिक की ठगी का शिकार बनाया गया था। 22 दिसंबर 2025 को उन्होंने खुद को गोली मार ली थी। अपने नोट में पूर्व आईजी ने गहरा अफसोस जताते हुए लिखा कि पुलिस सेवा के दौरान लोगों को साइबर ठगी से बचने की चेतावनी देने के बावजूद, वे खुद ठगों के अत्याधुनिक तरीकों का शिकार हो गए। उन्होंने इस निवेश के लिए दोस्तों और रिश्तेदारों से करीब 7 करोड़ उधार भी लिया था।


