प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की लोकशक्ति को आत्मविश्वास के नए शिखर पर पहुंचा दिया है। वे भारत के आत्मविश्वास को पुनर्जीवित करने वाले जननायक हैं। यह कहना है भाजपा के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष और खजुराहो सांसद विष्णुदत्त शर्मा का। विष्णुदत्त शर्मा ने मंगलवार को कहा कि मनुष्य स्वयं ही अपना मित्र और स्वयं ही अपना शत्रु है। गीता का यह उपदेश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जीवन की सच्ची व्याख्या करता है। मोदी का जीवन सिखाता है कि कठिन परिश्रम, अडिग संकल्प और राष्ट्रप्रेम से कोई भी व्यक्ति असाधारण ऊंचाइयों पर पहुंच सकता है। जब भारत 2047 में स्वतंत्रता का शताब्दी वर्ष मनाएगा, तब नरेंद्र मोदी का योगदान स्वर्ण अक्षरों में दर्ज होगा। वे केवल भारत के प्रधानमंत्री नहीं, बल्कि नए भारत के शिल्पी और वैश्विक नेतृत्व के प्रतीक हैं। गुजरात के बडनगर में जन्मे मोदी ने बचपन के संघर्ष से कठिनाइयों को अवसर में बदलना सीखा है। मां हीराबेन से उन्हें त्याग और सादगी के संस्कार मिले। गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में विकास का नया मॉडल देश के सामने पेश किया। लगातार प्रचंड जनसमर्थन जुटाकर वे तीसरी बार देश के प्रधानमंत्री बने हैं। यह लोकतंत्र में जनता के विश्वास और नेतृत्व की स्वीकृति का स्पष्ट प्रमाण है।


