राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर देशभर में जारी प्रवास श्रृंखला के तहत सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत 2 और 3 जनवरी को मध्यभारत प्रांत के भोपाल विभाग केंद्र पर दो दिवसीय प्रवास पर हैं। मोहन भागवत ने भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में युवा संवाद को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने अलग-अलग क्षेत्रों के युवाओं के सवालों के जवाब जिज्ञासा-समाधान सत्र में दिए। सतेंद्र दुबे (ग्वालियर) ने पूछा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्ष पूर्ण होने हो चुके हैं, अब विकसित भारत मे संघ की भूमिका क्या होगी?
मोहन भागवत- भारत की युवा पीढ़ी देश को आगे बढ़ाने का संकल्प ले चुकी है और दुनिया भी भारत से सीखने की जरूरत महसूस कर रही है। लेकिन विश्व सत्य नहीं, शक्ति सुनता है। इसलिए भारत को शारीरिक, बौद्धिक और नैतिक—तीनों तरह से सक्षम बनना होगा। संघ की भूमिका समाज को संगठित कर ऐसी शक्ति खड़ी करने की है, ताकि भारत फिर से विश्व को दिशा दे सके। देश सरकार, नेता या नीतियों से नहीं, बल्कि समाज के सामूहिक प्रयास से बड़ा बनता है। सरकार और राजनीतिक व्यवस्था सहायक होती हैं। समाज में इतनी ताकत होनी चाहिए कि वह इन सबसे सही काम करवा सके। संघ पिछले 100 साल से व्यक्ति निर्माण पर इसी सोच के साथ काम कर रहा है। शक्ति बल की होती है। शक्ति शील और युक्ति की भी होती है। तीनों मामलों में शक्ति चाहिए होती है। वो जैसी चाहिए वैसी शक्ति अभी आई नहीं हैं। उसके लिए प्रयास करना पड़ेगा। और संघ की भूमिका हमेशा से ही यही रही है। अपने सम्पूर्ण समाज की संगठित शक्ति के आधार पर अपने धर्म का संरक्षण करते हुए हम अपने देश को परम वैभव सम्पन्न बनाएंगे। आगे की बात कहने की आवश्यकता नहीं क्योंकि, जब-जब भारत बड़ा बनता है, विश्व को रास्ता ही दिखाता है। समाज मे सदाचार सदविचार सद्भावना का वातावरण बनाता है। संघ शक्ति परस्पर पूरक बनकर व्यक्ति निर्माण का काम कर रहा है। सवाल: आज के युवाओं में नैतिक साहस क्यों कमजोर पड़ रहा है? जवाब: व्यक्तिगत सुरक्षा की कोई गारंटी नहीं है। सुरक्षा की चिंता में जीवन को सीमित करना मनुष्य का नहीं, पशु का स्वभाव है। मनुष्य रिस्क लेकर ही आगे बढ़ता है। बिना जोखिम लिए उन्नति संभव नहीं। सजग रहना जरूरी है, लेकिन डर के साथ जीना नहीं। सवाल : करियर और सफलता को आप कैसे परिभाषित करते हैं? जवाब: करियर का मतलब बड़ा पद या ज्यादा पैसा नहीं है। करियर वह है, जिसमें व्यक्ति उत्कृष्ट काम कर सके। बच्चों को उनकी रुचि और क्षमता के अनुसार आगे बढ़ाना चाहिए, न कि समाज की होड़ में डॉक्टर–इंजीनियर बनाने की जिद में। सवाल : सुविधा और सुरक्षित जीवन को लेकर आपकी राय? जवाब: सुविधा एक भ्रम है। सुविधा से सुख नहीं मिलता। करियर, सुविधा और सुरक्षा—तीनों मृगतृष्णा हैं। इतिहास में जिन लोगों का जीवन सार्थक रहा, उन्होंने इन्हें प्राथमिकता नहीं दी। चंद्रशेखर आजाद और 1857 के क्रांतिकारी ‘सक्सेसफुल’ नहीं थे, लेकिन वही प्रेरणा बने। सवाल : बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों पर युवाओं की क्या भूमिका होनी चाहिए? जवाब: भारत में ऐसी स्थिति नहीं बननी चाहिए और भारत के हिंदू इतने समर्थ हों कि जरूरत पड़ने पर वहां के हिंदुओं की मदद कर सकें। यह अंतरराष्ट्रीय विषय है, उसकी मर्यादाएं हैं। लेकिन हिंदू समाज का आत्मविश्वास, जनसंख्या और संगठित शक्ति बनी रहनी चाहिए। सवाल : AI और नई तकनीकों के दौर में युवाओं की जिम्मेदारी क्या है? जवाब: तकनीक पर हमारा नियंत्रण होना चाहिए, न कि हम तकनीक के नियंत्रण में हों। AI और आधुनिक साधनों का उपयोग राष्ट्र और समाज के हित में हो, ऐसे जिम्मेदार और सक्षम युवाओं का निर्माण जरूरी है। मोहन भागवत बोले- देश पहले, तभी जीवन सुखी होगा सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा कि हम सब युवा हैं और हमारे सामने पूरा जीवन पड़ा है। हर कोई चाहता है कि जीवन अच्छा बीते, लेकिन केवल अपने लिए जीने से सुख की गारंटी नहीं मिलती। उन्होंने कहा कि अगर मेरा परिवार अस्थिर है, समाज ठीक नहीं है, तो व्यक्ति अकेले सुखी नहीं रह सकता। कश्मीर पंडितों का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि वे अच्छे, बुद्धिमान और शीलवान लोग थे, परिवार की चिंता भी करते थे, लेकिन समय रहते समाज की चिंता नहीं कर पाए, और उसका परिणाम सबने देखा। मोहन भागवत ने कहा कि अपने जीवन की चिंता स्वाभाविक है, लेकिन मनुष्य होने के नाते समाज और देश की चिंता भी उतनी ही जरूरी है। जब देश पहले की भावना आएगी, तभी समाज आगे बढ़ेगा और संकटों से मुक्ति मिलेगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि विकास वही है, जिसमें व्यक्ति का विकास परिवार और देश के विकास से जुड़ा हो। यदि कोई केवल अपना विकास देखता है और समाज व देश को छोड़ देता है, तो वह विकास नहीं, बल्कि विनाश की ओर कदम है। भारत का विकास उसकी अपनी सभ्यता और संस्कारों से जुड़े रास्ते पर चलने में है पश्चिमी मॉडल पर टिप्पणी करते हुए भागवत ने कहा कि जो हमारी प्रकृति, भाषा और संस्कृति के विरुद्ध है, वह हमें विकसित नहीं करेगा, बल्कि बिगाड़ेगा। जैसे हाथी का विकास साइकिल चलाने में और बंदर का विकास फुटबॉल खेलने में नहीं है, वैसे ही भारत का विकास उसकी अपनी सभ्यता और संस्कारों से जुड़े रास्ते पर चलने में है। उन्होंने कहा कि हमारी भाषा, संस्कृति और पीढ़ी-दर-पीढ़ी चले आ रहे संस्कार ही समाज को जोड़ते हैं, और इन संस्कारों की व्यवस्था घर और समाज—दोनों स्तर पर मजबूत होनी चाहिए। युवा संवाद में 31 जिलों के युवा हुए शामिल कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में प्रांत स्तरीय युवा संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में मध्यभारत प्रांत के सभी 31 जिलों (प्रशासनिक 16 जिले) से ऐसे युवा शामिल हुए जिन्होंने शिक्षा, सेवा, नवाचार, सामाजिक कार्य और अन्य क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियां अर्जित की हैं। दो दिनों में होंगे चार मुख्य कार्यक्रम सरसंघचालक के इस प्रवास के दौरान कुल चार प्रमुख कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिनमें युवा, सामाजिक-धार्मिक नेतृत्व और मातृशक्ति को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया है। सभी कार्यक्रम चयनित सहभागियों के साथ संवादात्मक स्वरूप में होंगे। प्रमुखजन गोष्ठी: समाज के प्रभावशाली लोगों से विमर्श शाम को रविन्द्र भवन के हंस ध्वनि सभागार में प्रमुखजन गोष्ठी आयोजित की जा रही है। इसमें भोपाल विभाग के सामाजिक, शैक्षणिक, सांस्कृतिक, व्यवसायिक और अन्य क्षेत्रों में सक्रिय प्रमुख व्यक्तित्वों को आमंत्रित किया गया है। गोष्ठी में संघ की शताब्दी यात्रा, सामाजिक समरसता और वर्तमान समय की चुनौतियों पर संवाद हो रहा है। सामाजिक सद्भाव बैठक: सभी समाजों के प्रतिनिधि होंगे शामिल 3 जनवरी को सुबह 9:30 बजे कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में सामाजिक सद्भाव बैठक आयोजित की जाएगी। इसमें प्रांत के सभी जिलों से विभिन्न समाजों के प्रमुख प्रतिनिधि भोपाल पहुंचेंगे। बैठक का उद्देश्य सामाजिक एकता, समरसता और पारस्परिक सहयोग को मजबूत करना है। सरसंघचालक इस मंच से समाज को जोड़ने वाले विचारों और साझा जिम्मेदारियों पर मार्गदर्शन देंगे। शक्ति संवाद: मातृशक्ति से सीधा संवाद 3 जनवरी को शाम 5 बजे भोपाल की प्रमुख मातृ शक्ति के साथ शक्ति संवाद कार्यक्रम आयोजित होगा। इस संवाद में समाज, परिवार और राष्ट्र निर्माण में मातृशक्ति की भूमिका पर चर्चा की जाएगी। यह कार्यक्रम महिला सहभागिता और सामाजिक नेतृत्व के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। शताब्दी वर्ष में बढ़ी संघ को जानने की जिज्ञासा संघ के शताब्दी वर्ष के चलते समाज के विभिन्न वर्गों में आरएसएस को लेकर जिज्ञासा और रुचि बढ़ी है। सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत के इस प्रवास के माध्यम से लोगों को संघ के बारे में तथ्यात्मक और वास्तविक जानकारी मिलेगी। साथ ही यह भी स्पष्ट होगा कि देश और समाज के निर्माण में नागरिक किस प्रकार सक्रिय भूमिका निभा सकते हैं। यह प्रवास संघ के शताब्दी वर्ष में भोपाल के लिए एक महत्वपूर्ण वैचारिक और सामाजिक आयोजन के रूप में देखा जा रहा है।


