मोहाली फेज-7 स्थित मनचंदा टावर में रेड कर पुलिस ने 10 लोगों को गिरफ्तार किया है जांच में पता चला कि आरोपी विदेशी नागरिकों को ठगते थे ये फर्जी सेंटर टावर की पहली और तीसरी मंजिल पर चल रहे थे। छापेमारी में पुलिस को 5 लैपटॉप, 9 मोबाइल फोन, 5 हेडफोन, और फॉरच्यूनर समेत दिल्ली-मोहाली नंबर की कई गाड़ियां बरामद हुई हैं। सभी आरोपियों को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें एक दिन के पुलिस रिमांड पर भेजा गया। पेपाल के नाम पर मेल भेजकर फंसाते डीएसपी साइबर रूपिंदर सोही ने बताया फर्जी कॉल सेंटर की पहली मंजिल पर पेपाल कस्टमर सपोर्ट के नाम पर विदेशी नागरिकों को ई-मेल भेजी जाती थी। इन ई-मेल में यह दावा किया जाता था कि उनका पेपाल अकाउंट हैक हो गया है या फिर उस अकाउंट से संदिग्ध लेन-देन हुआ है। मेल के साथ एक टोल-फ्री नंबर भी दिया जाता था, जो कॉल सेंटर में लैपटॉप पर इंस्टॉल Xlite ऐप से लिंक होता था। जैसे ही कोई विदेशी इस नंबर पर कॉल करता, सेंटर में बैठा स्टाफ खुद को पेपाल एजेंट बताकर बात करता और ग्राहक को डराता कि उनका अकाउंट अवैध गतिविधियों में इस्तेमाल हो रहा है। इसके बाद ग्राहक से रिफंड या अकाउंट अनलॉक कराने के नाम पर Apple गिफ्ट कार्ड, बिटकॉइन खरीद या डेबिट/क्रेडिट कार्ड की जानकारी मांगी जाती थी। प्राप्त डिटेल्स का इस्तेमाल कर आरोपी फर्जी पेमेंट गेटवे के ज़रिए राशि को अपने नेटवर्क में ट्रांसफर कर लेते थे। इस रकम को हवाला या यूएस डीटी क्रिप्टो माध्यम से भारत में कैश कराया जाता था। पहली मंजिल से गिरफ्तार …. तीसरी मंजिल पर फर्जी टिकट बुकिंग …… पुलिस जांच में सामने आया आरोपी तीसरी मंजिल पर एक ट्रैवल कंपनी के नाम पर अलग ढंग की ठगी कर रहे थे। यहां पर एक वेबसाइट “trialpro.com” के ज़रिए विदेशी नागरिकों को सस्ते दामों पर फ्लाइट टिकट देने का झांसा दिया जाता था। जब कोई ग्राहक टिकट बुक करने के लिए संपर्क करता, तो उनसे कार्ड डिटेल लेकर फर्जी पेमेंट गेटवे से पैसा काट लिया जाता था। लेकिन न टिकट मिलती थी, न ही पैसा वापस। आरोपी इन फर्जी ट्रांजेक्शनों के लिए अलग-अलग वेंडरों और गेटवे प्रोवाइडर्स का इस्तेमाल करते थे, जो अपना कमीशन काटकर बाकी रकम कैश में दे देते थे। इसी गोरखधंधे के ज़रिए करोड़ों की ठगी की जा रही थी और विदेशी नागरिकों को लगातार निशाना बनाया जा रहा था। तीसरी मंजिल से गिरफ्तार आरोपी…… नेटवर्क की तलाश में पुलिस……. आरोपी मोहाली और खरड़ के अलग-अलग हिस्सों में किराये के मकानों में रहकर ठगी चला रहे थे। पैसों को हवाला और क्रिप्टो करेंसी (USDT) के ज़रिए भारत में कैश कराया जाता था। पुलिस अब ईमेल ट्रैफिक, कॉल रिकॉर्ड, पेमेंट गेटवे और हवाला चैनल की जांच में जुट गई है।फरार आरोपियों की तलाश के लिए टीमें बनाई गई हैं।स्पेशल ऑपरेशन सेल के इंचार्ज इंस्पेक्टर दरबारा सिंह ने बताया कि आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।


