बारिश के कारण शहर में करीब 200 किलोमीटर लंबी सड़कें क्षतिग्रस्त हो गई हैं। पीडब्ल्यूडी की ओर से किए जा रहे सर्वे में यह आंकड़ा सामने आया है, लेकिन मरम्मत केवल 69 किलोमीटर लंबी सड़कों की ही होगी, क्योंकि राज्य सरकार ने मात्र 30 करोड़ रुपए का बजट मंजूर किया है। बारिश के कारण सड़कों के क्षतिग्रस्त होने का मुद्दा लगातार भास्कर में उठने के बाद पीडब्ल्यूडी ने एक सितंबर को सर्वे शुरू किया था। पूर्व और पश्चिम विधानसभा में सड़कों का सर्वे अभी चल रहा है। अब तक करीब 200 किलोमीटर लंबी सड़कों को चिन्हित किया जा चुका है। इसके चलते सड़कों की मरम्मत का काम भी शुरू हो गया है। इसकी शुरुआत पूर्व विधानसभा क्षेत्र से हुई है। सबसे पहले पवनपुरी शनि मंदिर से लेकर नागणेची जी मंदिर तक की सड़क को लिया गया है। यह पूरी सड़क ही कई जगह से बुरी तरह टूट चुकी थी, जिसे नया बनाया जा रहा है। जहां सीसी सड़क है वहां डामरीकरण नहीं होगा, सीसी रोड की ही मरम्मत की जाएगी। एक साल बाद हो रही मरम्मत शहर की सड़कों की मरम्मत का काम एक साल बाद हो रहा है। यह सड़कें पिछले साल बारिश में टूटी थीं। उसके बाद कुछ सड़कों की मरम्मत हुई। इस बार मानसून में स्थिति और भी ज्यादा खराब हो गई। सड़कों पर एक से डेढ़ फीट गहरे गड्ढे हो गए, जिससे आए दिन हादसे हो रहे थे। हालांकि सरकार ने बजट काफी कम दिया है। इससे पूरे शहर की सड़कों को नहीं सुधारा जा सकेगा। पीडब्ल्यूडी की सड़कों की मरम्मत का काम शुरू हो गया है, लेकिन नगर निगम की सड़कों का काम अब तक शुरू नहीं हो पाया है। भास्कर एक्सपर्ट – नरेश जोशी, रिटायर्ड एक्सईएन, पीडब्ल्यूडी शहर में ड्रेनेज नहीं होने सेबार-बार टूट रही सड़कें शहर में ड्रेनेज की समस्या सबसे बड़ी है। नालियों की सफाई नहीं होती। पानी सड़कों पर पसरा रहता है। इसके अलावा निर्माण की खामियां भी हैं। जहां तक सीसी रोड की बात है तो उसके निर्माण में थोड़ी सी भी कमी रहने पर जल्दी टूटने लगती है। जोड़ खुल जाते हैं। नई सड़क का सिक्योरिंग पीरियड 14 दिन का होता है, लेकिन बनने के साथ ही ट्रैफिक चालू हो जाता है। भारी वाहन निकलने से सड़क क्षतिग्रस्त होने लगती है। इसलिए अभियंताओं को मौके पर खड़े रहकर काम कराना चाहिए। डिफेक्ट लाइबिलिटी पीरियड पर भी ध्यान नहीं दिया जाता है। “बारिश से क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत का काम शुरू कर दिया गया है। पूर्व और पश्चिम विधानसभा में कुल 69 किमी सड़कों की मरम्मत इस बजट से हो सकेगी।” — डॉ. विमल गहलोत, सिटी एक्सईएन, पीडब्ल्यूडी


