रीवा के बाजार में चमकदार और गहरे लाल दिखने वाले टमाटर आपकी सेहत के लिए खतरनाक साबित हो सकते हैं। केमिकल वाले पानी से लाल हुए टमाटर से आपको लिवर खराब और कैंसर तक हो सकता है। धौंचट गांव में कच्चे टमाटरों को तोड़कर केमिकल युक्त पानी में डुबोकर पकाने का मामला सामने आया है। यहां टमाटर को लाल बनाने के लिए एथिल फिनोल 39%, कैल्शियम कारबाइट जैसे केमिकल का इस्तेमाल अधिक मात्रा में किया जा रहा है। इस प्रक्रिया में कच्चे टमाटर 10 से 15 दिन पहले तोड़ लिए जाते हैं और यह केमिकल के जरिए कुछ ही घंटों में पकाकर मंडियों में सप्लाई कर दिए जाते हैं। बाहर से टमाटर ताजा और आकर्षक दिखते हैं, लेकिन अंदर से सेहत के लिए गंभीर खतरा बन सकते हैं। फूड प्वाइजनिंग से लेकर कैंसर तक का खतरा
विशेषज्ञों के मुताबिक एथिल फिनोल जैसे केमिकल का इस्तेमाल केवल वैज्ञानिक निगरानी में सीमित मात्रा में होना चाहिए। खुलेआम इसका प्रयोग फूड प्वाइजनिंग, लिवर डैमेज और लंबे समय में कैंसर जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ा सकता है। प्रशासन की अनदेखी पर सवाल
रीवा मुख्यालय से महज 10 किलोमीटर दूर धौंचट गांव में किसान द्वारा टमाटर को केमिकल में डुबोकर पकाने का आरोप है। सवाल उठ रहे हैं कि यह केमिकल कौन बेच रहा है, किसान इसका इस्तेमाल क्यों कर रहे हैं और प्रशासन की निगरानी कहां है? प्राकृतिक खेती बनाम हकीकत
एक ओर रीवा में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए बड़े-बड़े सम्मेलन हो रहे हैं, वहीं दूसरी ओर धरातल पर केमिकल से पकाई जा रही सब्जियां बाजार में पहुंच रही हैं। यह विरोधाभास सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े करता है। स्थानीय निवासी का दावा स्थानीय निवासी अरुणेंद्र सिंह का दावा है कि उन्होंने अपनी आंखों के सामने खेतों से टमाटर तोड़कर केमिकल में भिगोते हुए देखा है। उनका कहना है कि इस प्रक्रिया की जांच होनी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके। इन बातों पर सावधानी बरतें लोग
बहुत ज्यादा चमकदार और गहरे लाल टमाटर से सावधान रहें सब्जियों को अच्छी तरह धोकर ही उपयोग करें। शक होने पर स्थानीय प्रशासन और फूड सेफ्टी विभाग को सूचना दें। प्रशासन से मांग की जा रही है कि निष्पक्ष जांच कर केमिकल से पकाए जा रहे टमाटर और अन्य फलों-सब्जियों की सप्लाई पर सख्त कार्रवाई की जाए।


