राजधानी में जनसंख्या और वाहनों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन हमारी यातायात पुलिस अभी तक 72 प्रतिशत जाब्ते की कमी से जूझ रही है। ब्यूरो ऑफ पुलिस रिसर्च एंड डवलपमेंट (बीपीआरडी) के अनुसार यातायात पुलिस को अभी तक 45 प्रतिशत स्वीकृति कमी है और स्वीकृति में 48 प्रतिशत जाब्ता कम मिला हुआ है। इसी का नतीजा है कि शहर के आधे से ज्यादा चौराहों पर यातायात व्यवस्था बिगड़ी रहती हैं और लोगों को जाम से परेशान होना पड़ता है। बीपीआरडी नियमों के अनुसार 850 वाहनों की संख्या पर एक यातायात पुलिसकर्मी होना चाहिए। इस तरह से जयपुर शहर में करीब 5350 पुलिसकर्मी होने चाहिए, लेकिन अभी तक पुराने समय से 2935 पद ही स्वीकृत चल रहे हैं। मौजूदा हालात देखे तो स्वीकृत 2935 में से केवल 1498 कार्मिक मौजूद है।


