लोहरदगा-रांची मेमू ट्रेन। इस ट्रेन से हर दिन सुबह 7 बजे अरगोड़ा स्टेशन पर 2000 से अधिक लोग रांची पहुंचते हैं। आने वाले लोगों में अधिकांश लोहरदगा व उसके आसपास इलाके के होते हैं। इस ट्रेन में रोज सुबह पैर रखने तक की जगह नहीं होती। लोग जान जोिखम में डाल गेट पर लटक कर यात्रा करते हैं। इस ट्रेन से लोग सुबह-सुबह रांची इसलिए आते हैं कि उन्हें शहर में काम मिल सके। काम करेंगे तो उनका घर चलेगा। इस ट्रेन से हर दिन सबसे अधिक मजदूर व स्टूडेंट्स लोहरदगा से रांची आते हैं। वे जानते हैं कि ऐसे सफर करना खतरनाक है, लेकिन इससे सस्ता उनके पास कोई विकल्प नहीं है।
इस ट्रेन से काम करने आने वाले मजदूर रांची में ही अपना कुदाल-गैंता छोड़ जाते हैं। इसके लिए एक निर्धारित जगह भी है। जहां इन मजदूरों के कुदाल-गैंता को पांच रुपए प्रति दिन के हिसाब से सुरक्षित रखा जाता है। पहचान के लिए सभी कुदाल पर एक टोकन नंबर भी लगाया जाता है, ताकि कोई अदला-बदली न हो जाए। काम खत्म होने के बाद सभी अपना कुदाल उसी जगह जमा कर फिर इसी ट्रेन से वापस अपने घर लौट जाते हैं। कुदाल रांची में ही रखते हैं, देते हैं भाड़ा, लोहरदगा-रांची मेमू ट्रेन से शहर आने वालों में सबसे अधिक मजदूर व स्टूडेंट्स, वापसी भी इसी से


