बिलासपुर के सिम्स मेडिकल कॉलेज अस्पताल में एक युवती के लीवर से 10 सेंटीमीटर का हाइडेटिड सिस्ट निकाला गया। सर्जरी विभाग की टीम ने दूरबीन (लैप्रोस्कोपिक) तकनीक का इस्तेमाल कर इस सिस्ट को सुरक्षित रूप से बाहर निकाला। सिम्स के डीन डॉ. रमणेश मूर्ति ने बताया कि यह एक परजीवी गोला होता है। यह सिम्स में इस तरह की पांचवीं सफल लैप्रोस्कोपिक सर्जरी है। जानकारी के मुताबिक, मुंगेली की 20 वर्षीय तीजन नेताम पेट में भारीपन, भूख कम लगना और असहजता की शिकायत के साथ सिम्स पहुंची थीं। जांच में सोनोग्राफी और सीटी स्कैन के माध्यम से उनके लीवर के दाहिने हिस्से में एक बड़ा हाइडेटिड सिस्ट पाया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए सिम्स दूरबीन पद्धति से ऑपरेशन का निर्णय लिया गया।डॉक्टरों की एक विशेषज्ञ टीम ने बिना किसी जटिलता के यह ऑपरेशन सफलतापूर्वक पूरा किया। इन डॉक्टरों ने की सर्जरी सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. ओपी राज के नेतृत्व में डॉ. रघुराज सिंह, डॉ. बीडी तिवारी और डॉ. प्रियंका माहेश्वर की टीम ने सर्जरी की। एनेस्थीसिया विभाग से डॉ. मधुमिता मूर्ति, डॉ. भावना रायजादा, डॉ. मिल्टन, डॉ. मयंक आगरे और पीजी रेजिडेंट्स ने इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। रेडियोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. अर्चना सिंह ने सटीक रिपोर्टिंग कर सर्जरी में अहम सहयोग दिया। सिम्स प्रबंधन का दावा है कि लैप्रोस्कोपिक तकनीक की वजह से बहुत कम चीरा लगा,रक्तस्राव लगभग नगण्य रहा और मरीज जल्द ही सामान्य दिनचर्या में लौट सकती है। क्या होता है हाइडेटिड सिस्ट ? यह एक परजीवी संक्रमण है, जो इकाईनोकोकस ग्रेन्यूलोसस (कुत्ता फीता कृमि) के कारण होता है। यह आमतौर पर लीवर और फेफड़ों को प्रभावित करता है। संक्रमण अक्सर दूषित पानी, संक्रमित भोजन, और कुत्तों-भेड़ों के संपर्क से फैलता है। जानिए क्या इस बीमारी के मुख्य लक्षण ? डॉक्टरों के मुताबिक पेट दर्द, भारीपन, भूख कम लगना, जल्दी पेट भरने का एहसास इसके मुख्य लक्षण है। गहरे और बड़े सिस्ट लीवर की कार्यप्रणाली पर असर डालते हैं और फटने पर ऐनाफाइलैक्सिस जैसी जानलेवा स्थिति भी बन सकती है। स्वच्छ पानी, साफ भोजन और राष्ट्रीय कृमि मुक्ति अभियान के तहत क्रीमनाशक दवाओं का सेवन कर इस रोग से बचाव किया जा सकता है।


