रामनरेश परिहार। धौलपुर जहां आज के दौर में बड़ी संख्या में युवा रोजगार की तलाश में शहरों की ओर पलायन कर रहे हैं,वहीं धौलपुर जिले के कुछ युवाओं ने गांव में रहकर बदलाव की नई कहानी लिखी है। इन युवाओं की सकारात्मक सोच से शुरू हुआ ‘हर घर शिक्षा’ अभियान आज ग्रामीण अंचल में शिक्षा और सामाजिक जागरूकता की मजबूत मिसाल बन चुका है। छोटे-छोटे गांवों से शुरू हुई यह पहल अब एक ऐसे आंदोलन में बदल गई है,जो बच्चों के भविष्य के साथ-साथ समाज की सोच भी बदल रही है।‘हर घर शिक्षा’ अभियान की शुरुआत वर्ष 2022 में जिले के बाड़ी उपखंड के एक छोटे से गांव खानपुर मीणा से हुई। संसाधन सीमित थे,न कोई बड़ा मंच था और न ही आर्थिक सहारा,लेकिन युवाओं के हौसले बुलंद थे। उद्देश्य एकदम साफ था कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे। टीम ने गांव-गांव जाकर घर-घर संपर्क किया,अभिभावकों से संवाद किया और स्कूल छोड़ चुके बच्चों को दोबारा पढ़ाई से जोड़ने का प्रयास शुरू किया। युवाओं ने मंदिरों, सामुदायिक भवनों और खुले मैदानों में छोटे-छोटे शिक्षा केंद्र शुरू किए। यहां बच्चों को सिर्फ किताबों का ज्ञान ही नहीं दिया गया, बल्कि जीवन मूल्यों, अनुशासन और आत्मविश्वास पर भी काम किया गया। खास बात यह रही कि पढ़ाई को बोझ नहीं,बल्कि उत्सव की तरह पेश किया गया। खेल-खेल में पढ़ाई, संवाद और प्रेरक गतिविधियों ने बच्चों में सीखने की ललक पैदा की। चुनौतियां आईं, लेकिन हौसले नहीं टूटे… संस्था के अध्यक्ष रोहित मीणा ने बताया कि अभियान के दौरान कई सामाजिक चुनौतियां सामने आईं। कहीं गरीबी आड़े आई तो कहीं पारिवारिक जिम्मेदारियों ने बच्चों को स्कूल से दूर रखा। लेकिन युवाओं ने हार नहीं मानी। जरूरतमंद बच्चों को कॉपी, किताबें और पेन उपलब्ध कराए गए। अभिभावकों के साथ बैठकों के जरिए यह भरोसा दिलाया गया कि शिक्षा ही बच्चों के बेहतर भविष्य की सबसे मजबूत कुंजी है। आज ‘हर घर शिक्षा’ का असर गांवों में साफ नजर आने लगा है। कई बच्चे, जो कभी स्कूल का मुंह नहीं देखते थे, अब नियमित पढ़ाई कर रहे हैं। अभिभावकों की सोच बदली है और वे बच्चों को आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। अभियान से जुड़े युवाओं का कहना है कि यह सिर्फ पढ़ाने की मुहिम नहीं, बल्कि समाज को सही दिशा देने का प्रयास है। किताब नहीं देखी तो आया विचार… संस्था अध्यक्ष रोहित मीणा बताते हैं कि उनके गांव में कई बच्चे पढ़ाई की उम्र में मजदूरी और घरेलू कामों में लगे थे। बच्चों के हाथों में किताबों की जगह काम देखकर उन्हें गहरी पीड़ा हुई। तभी उन्होंने महसूस किया कि संसाधनों से ज्यादा बड़ी कमी सोच की है। यहीं से विचार जन्मा अगर हर घर तक शिक्षा का महत्व पहुंचे, तो हालात बदले जा सकते हैं। इसी सोच के साथ 2022 में युवाओं को जोड़कर ‘हर घर शिक्षा’ की नींव रखी गई, जो आज ग्रामीण शिक्षा की एक मजबूत आवाज बन चुकी है।


