युवा महोत्सव में उमड़ी ऊर्जा:लोकगीत से लेकर भरतनाट्यम तक, सांस्कृतिक रंगों में डूबा चित्तौड़गढ़

चित्तौड़गढ़ में बुधवार का दिन पूरी तरह युवा ऊर्जा और सांस्कृतिक रंगों से भरा नजर आया। जिला स्तरीय युवा महोत्सव में हजारों युवा अपनी प्रतिभा दिखाने पहुंचे। सुबह से ही शहीद मेजर नटवर सिंह स्कूल परिसर में भीड़ दिखाई देने लगी। अलग-अलग प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने आए युवाओं ने मंच पर उतरने से पहले कई घंटों तक अपनी तैयारियों को निखारा। 22 प्रतियोगिताओं वाले इस बड़े आयोजन ने उन प्रतिभाशाली युवाओं को भी मौका दिया, जिन्हें आमतौर पर मंच नहीं मिल पाता। लोक कला, नवाचार, जीवन कौशल और दुर्लभ कलाओं से भरा यह आयोजन जिले की संस्कृति को एक नई पहचान देता दिखा। लोकगीत और नृत्य ने खींचा दर्शकों का ध्यान शारीरिक शिक्षक रेखा चौधरी ने बताया कि सांस्कृतिक मंच पर लगातार लोकगीत, लोकनृत्य, समूह नृत्य और एकल प्रस्तुति होती रही। दर्शक हर प्रस्तुति पर तालियां बजाते नजर आए। समूह नृत्य में युवाओं की ऊर्जा और एकजुटता देखने लायक थी। मंच के पीछे भी माहौल उतना ही उत्साह भरा था। प्रतिभागी पारंपरिक पहनावे में, मेकअप और एक्सप्रेशन के साथ अपनी प्रस्तुति को बेहतर बनाने की तैयारी करते दिखे। इससे साफ था कि युवा इस अवसर को कितनी गंभीरता से ले रहे हैं और इसे अपने भविष्य का बड़ा कदम मान रहे हैं। 1500 युवाओं ने कराया ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन रेखा चौधरी ने बताया कि इस बार युवा महोत्सव में सरकार द्वारा समर्थित कार्यक्रम के तहत लगभग 1500 ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन हुए हैं। प्रतियोगिताओं में समूह गीत, समूह नृत्य, एकल नृत्य, एकल गीत, फड़ पेंटिंग सहित कई विधाएं शामिल की गई हैं। हर प्रतियोगिता में युवाओं को अपनी कला दिखाने और निखारने का पूरा अवसर दिया जा रहा है। सभी प्रतिभागी स्वयं ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कर इस मंच तक पहुंचे हैं, जो यह साबित करता है कि युवा खुद आगे आकर अपनी प्रतिभा दिखाना चाहते हैं। भाग लेने के लिए तय की गई आयु सीमा प्रतियोगिता के लिए 15 वर्ष की आयु सीमा तय की गई है। जो युवा समय पर पहुंचे और रजिस्ट्रेशन व आधार कार्ड दिखाकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हैं, उन्हें मंच पर प्रस्तुति का मौका दिया जा रहा है। यह प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी रखी गई है ताकि प्रतिभाशाली बच्चों को आगे बढ़ने का समान अवसर मिले। जो प्रतिभागी जिला स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करेंगे, वे आगे राज्य स्तर पर हिस्सा लेने के लिए चयनित होंगे। ग्रामीण क्षेत्र के युवाओं ने दिखाया अधिक उत्साह इस महोत्सव की खास बात यह रही कि ग्रामीण क्षेत्रों से आए बच्चों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। शिक्षक रेखा चौधरी के अनुसार, गांवों से आए ये बच्चे अपने गांव की संस्कृति और कला को बड़े मंच पर लेकर आए हैं। इससे साफ है कि गांवों में भी प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, बस जरूरत है सही मंच और अवसर की। राज्य स्तर पर प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को सरकार की ओर से पुरस्कार राशि दी जाएगी, जो सीधे उनके खाते में जमा होगी। भूपालसागर निवासी कृतिका पाराशर ने बताया कि युवा महोत्सव में अनेक प्रकार की प्रतियोगिताएं हो रही हैं, जिनका उद्देश्य हमारे कल्चर, कला, विज्ञान और पारंपरिक विधाओं को बढ़ावा देना है। मैंने यहां भरतनाट्यम प्रस्तुत किया है, क्योंकि मेरा झुकाव शुरू से ही हमारी संस्कृति की ओर रहा है। आजकल आधुनिक चीजें बहुत तेज़ी से आगे बढ़ रही हैं, जबकि हमारा कल्चर कहीं पीछे छूट रहा है। इसी सोच से मुझे प्रेरणा मिली कि हमें अपनी संस्कृति को आगे बढ़ाना चाहिए और उसे नए मंचों तक पहुंचाना चाहिए। मैंने यह डांस खुद से सीखा है और आगे इसे और सीखने का मन है। युवा महोत्सव जैसे कार्यक्रमों से युवाओं को एक मंच मिलता है, जहां वे अपनी प्रतिभा दिखा सकते हैं और आगे बढ़ सकते हैं। ऐसे मंच ज्यादा से ज्यादा होने चाहिए। गंगरार निवासी 17 साल की किट्टू शर्मा ने बताया कि मुझे डांस का बहुत ज्यादा शौक है। जब मुझे पता चला कि यहां से आगे नेशनल स्तर तक जाने का मौका मिलेगा और यही से सिलेक्शन होंगे, तो मुझे बहुत उत्साह मिला कि मैं भी अपना डांस दिखाऊं। डांस करते समय थोड़ी घबराहट भी हुई, लेकिन शौक इतना गहरा है कि मैंने पूरे दिल से परफॉर्म किया। सरसी गांव की 22 साल की कृष्णा वैष्णव ने बताया कि आज का परफ़ॉर्मेंस काफी एनर्जेटिक था। यहां इतने युवाओं को एक साथ देख कर मन में बहुत उत्साह आता है। मेरा सरकार से यही अनुरोध है कि ऐसे कार्यक्रम और ज़्यादा आयोजित किए जाएं, ताकि अधिक से अधिक युवा अपनी प्रतिभा दिखा सकें। टैलेंट हर किसी में होता है, लेकिन अक्सर उन्हें मंच नहीं मिल पाता। खासकर जिनके पास आर्थिक संसाधन कम होते हैं, वे आगे नहीं बढ़ पाते। ऐसे मंच उनके लिए उम्मीद का बड़ा सहारा बनते हैं और उन्हें अपनी पहचान बनाने का मौका मिलता है। सुनने में आया है कि आगे चलकर हमें इंटरनेशनल लेवल तक परफ़ॉर्म करने का मौका मिल सकता है। अगर ऐसा होता है तो भारत की संस्कृति विदेशों तक पहुंचेगी और हमारे कलाकारों के लिए एक नया रास्ता खुलेगा।

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