जोधपुर के चौपासनी हाउसिंग बोर्ड थाना क्षेत्र में विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी और अमानवीय प्रताड़ना का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। इस घटना ने एक बार फिर ‘डंकी रूट’(अवैध तरीके से विदेश जाना) के खतरों को उजागर कर दिया है। शातिर ठगों ने एक दंपती को अमेरिका और जापान में नौकरी का सपना दिखाया, लेकिन ट्रंप सरकार में काम की अनिश्चितता का बहाना बनाकर अचानक प्लान बदल दिया और हकीकत में अमेरिका-जापान की बजाय उन्हें बैंकॉक, मकाऊ और कोरिया जैसे देशों में भटकने पर मजबूर कर दिया, जहां उन्हें मानसिक और शारीरिक यातनाएं झेलनी पड़ीं। इस दौरान पीड़िता और उसके पति को विदेशी जेल में रहना पड़ा, भूखे-प्यासे दिन गुजारने पड़े और अंत में दुबई में बंधक बनाकर रखा गया। पीड़ित दंपती की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। एफआईआर में कुल 13 लाख 75 हजार रुपए की ठगी और जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया गया है। आरोपियों ने विदेश में नौकरी दिलाने के बहाने मांगे 21 लाख रुपए एफआईआर के मुताबिक, बीआर बिड़ला स्कूल के पास आदेश्वर नगर निवासी पूनम प्रजापत और उनके पति संजीव कुमार विदेश में नौकरी करना चाहते थे। अप्रैल 2025 में उनकी बात कुचामन के डीडवाना निवासी ईशा अग्रवाल और बाबूलाल पंवार से हुई। आरोपियों ने दंपती को भरोसे में लेने के लिए विदेश भेजने के कई झूठे किस्से सुनाए। शुरुआत में आरोपियों ने USA या जापान में नौकरी दिलाने का वादा किया और इसके बदले 21 लाख रुपए की मांग की। भरोसे के तौर पर 50 हजार रुपए एडवांस ले लिए। कुछ दिन बाद आरोपियों ने एक अजीब तर्क दिया। ट्रंप सरकार में काम की अनिश्चितता का बहाना बनाकर बदला प्लान उन्होंने कहा कि “अभी यूएसए में ट्रंप सरकार है और वहां काम की अनिश्चितता है,” इसलिए वे उन्हें यूके या जापान भेज देंगे। अंत में कोरिया (जेजू) में अच्छी नौकरी और रहने-खाने की सुविधा का झांसा देकर डील पक्की की गई। प्वॉइंट्स में समझिए पूरा घटनाक्रम सपनों की उड़ान बनी मुसीबत का सफर तारीख-दर-तारीख और भी खौफनाक होती गई इस ठगी की कहानी: कोरिया में जेल और डिपोर्टेशन कोरिया (जेजू) एयरपोर्ट पहुंचते ही इमिग्रेशन अधिकारियों ने दंपती को हिरासत में ले लिया। उन्हें चार दिन तक जेल में रहना पड़ा। आरोपियों ने यहां भी खेल खेला और वकील करने के नाम पर 25 हजार रुपए ऐंठ लिए, लेकिन कोई वकील नहीं आया। दंपती जेल में भूखे-प्यासे रहे और अंततः उन्हें जुलाई 2025 में भारत डिपोर्ट कर दिया गया। माफी मांगकर दोबारा जाल में फंसाया भारत लौटने पर जब पीड़ितों ने आरोपियों से अपने पैसे वापस मांगे और नाराजगी जताई, तो आरोपी उनके पैरों में गिर गए। उन्होंने माफी मांगी और कहा कि पिछला काम बिगड़ गया था, लेकिन अब वे दुबई में पक्की नौकरी लगवा देंगे। फिर दंपती उनके झांसे में आ गया। आरोपी उन्हें साथ लेकर दुबई गए। वहां 2 लाख रुपए नकद लिए और एक ऑफिस में ले जाकर परमानेंट जॉब का भरोसा दिलाकर 6 लाख रुपए और ट्रांसफर करवा लिए। दुबई में बंधक बनाकर छीने पासपोर्ट दुबई में 15 दिन तक दंपती को एक घर में रखा गया, लेकिन कोई काम नहीं दिलाया। जब उन्होंने नौकरी के लिए तकाजा किया, तो आरोपियों ने रंग बदल लिया। उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई और पासपोर्ट छीनकर बंधक बना लिया गया। छोड़ने के बदले फिर पैसों की मांग की गई। एफआईआर के अनुसार, एक दिन मौका पाकर दंपती को अपने पासपोर्ट मिल गए और वे वहां से भागकर किसी तरह इंडिया वापस लौटे। पैसे मांगे तो दी जान से मारने की धमकी भारत आकर जब पीड़ित 5-6 दिन पहले डीडवाना स्थित आरोपियों के घर गए और अपने 13.75 लाख रुपए वापस मांगे, तो आरोपियों ने उल्टे 10 लाख रुपए की डिमांड कर दी। उन्होंने धमकी दी कि अगर पैसे नहीं दिए तो जान से मार देंगे। आखिरकार परेशान होकर पूनम प्रजापत ने कोर्ट के जरिए इस्तगासा पेश किया। जिस पर पुलिस थाना चौपासनी हाउसिंग बोर्ड पुलिस ने 5 जनवरी 2026 को आरोपी ईशा अग्रवाल और बाबूलाल के खिलाफ इन धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। मामले में लगाई गई भारतीय न्याय संहिता की धाराएं… धारा 127(2) और 127(3) गैरकानूनी बंधक बनाने और उसके लिए छुड़ौती मांगने से संबंधित हैं। धारा 318(4) धोखाधड़ी से दस्तावेज बनाने, धारा 316(2) आपराधिक विश्वासघात, धारा 115(2) स्वेच्छा से चोट पहुंचाने, धारा 336(2) और 336(3) जान से मारने की धमकी देने, धारा 338 धमकी देने और धारा 137(2) और 140(2) चोरी और लूट से संबंधित हैं।


