रूस से चल रही जंग के बीच यूक्रेन के दूसरे सबसे ताकतवर शख्स और चीफ ऑफ स्टाफ एंड्री एंड्री येरमाक के घर पर एंटी-करप्शन एजेंसियों ने छापेमारी की है। जांच एजेंसियों ने यूक्रेन में 800 करोड़ रुपए के भ्रष्टाचार का खुलासा किया है। यूक्रेन की राष्ट्रीय भ्रष्टाचार निरोधक एजेंसी (NABU) और SAP (विशेष एंटी-करप्शन अभियोजन कार्यालय) ने येरमाक के अपार्टमेंट की तलाशी ली है। एजेंसियों ने कहा कि यह कार्रवाई अदालत की अनुमति से की गई है। हालांकि अब तक जेलेंस्की या येरमाक पर किसी भी गलत काम का आरोप नहीं लगा है। येरमाक को जेलेंस्की का सबसे भरोसेमंद सलाहकार माना जाता है। घोटाले के बाद जेलेंस्की सरकार ने अब तक दो मंत्रियों को बर्खास्त किया है। कई आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। एक प्रमुख कारोबारी और जेलेंस्की के पुराने सहयोगी तिमूर मिनडिच देश छोड़कर भाग चुके हैं। एनर्जी सेक्टर में सरकारी पैसे की हेराफेरी जांच एजेंसियों ने दावा किया है कि सरकारी ऊर्जा कंपनियों में काम के बदले रिश्वत लेने और सरकारी पैसे की हेराफेरी का बड़ा नेटवर्क पकड़ा गया है। इसमें देश की परमाणु ऊर्जा फर्म एनर्जोएटम का नाम खासतौर पर सामने आया है। आरोप है कि अधिकारियों ने बिजली और ऊर्जा के प्रोजेक्ट्स के लिए रखे गए सरकारी पैसे को निजी फायदे के लिए इस्तेमाल किया। रूस के हमलों से पहले ही यूक्रेन की बिजली व्यवस्था चरमराई हुई है। कई शहरों में लोग दिन में कुछ ही घंटे बिजली पा रहे हैं। ऐसे में इस घोटाले ने जनता के गुस्से को और बढ़ा दिया है। जेलेंस्की पर भी दबाव बढ़ा येरमाक युद्ध के दौरान यूक्रेन की रणनीति बनाने में सबसे अहम भूमिका निभाते रहे हैं। जेलेंस्की ने उन्हें अमेरिका के साथ बातचीत की जिम्मेदारी दी है, ताकि वे 28 पॉइंट वाले अमेरिका के पीस प्लान को दोबारा तैयार कर सकें। ट्रम्प ने इस प्लान को रूस-यूक्रेन जंग खत्म करने के लिए बनाया है। लेकिन हाल के भ्रष्टाचार मामले के बाद विपक्ष येरमाक के इस्तीफे की मांग कर रहा है। जंग, बिजली संकट और अब 800 करोड़ के घोटाले ने जेलेंस्की सरकार पर दबाव बढ़ा दिया है। दूसरी तरफ अमेरिका भी जंग रोकने के लिए जेलेंस्की पर रूस के साथ पीस डील करने का दबाव बढ़ा रहा है।


