विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने उदयपुर के सुखाड़िया सहित देशभर के विश्वविद्यालयों को फैलोशिप लेने के बाद भी पीएचडी थीसिस सब्मिट नहीं करने वालों से वसूली करने के निर्देश जारी किए हैं। ये निर्देश 16 दिसंबर को जारी किए गए और डिफॉल्टर शोधार्थियों की सूची वसूली राशि के साथ भेजी है। सुविवि में ऐसे 50 डिफॉल्टर हैं। अब विवि प्रशासन इनसे 33 लाख 28 हजार 558 रुपए की वसूली करेगा। एक डिफॉल्टर से औसतन 66 हजार 571 रुपए की वसूली की जाएगी। प्रदेश में 15 से ज्यादा विश्वविद्यालयों को ये निर्देश दिए गए हैं। इन सभी में 500 से ज्यादा शोधार्थियों से 3.32 करोड़ रु. से ज्यादा की वसूली की जाएगी। सुविवि रजिस्ट्रार डॉ. वृद्धिचंद गर्ग ने बताया कि डिफॉल्टर शोधार्थियों से वसूली की कार्रवाई के लिए कागजी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। फैलोशिप लेने के बाद भी पीएचडी नहीं करने वालों के खिलाफ वसूली का प्रावधान है। नए शोध कार्यों की सोच को धक्का, इसलिए की सख्ती सुविवि से दो विषयों में जेआरएफ व पीएचडी कर चुके डॉ. भूपेन्द्र आर्य बताते हैं कि देश के शिक्षा मंत्रालय का पूरा फोकस देशभर के शोधार्थियों से उत्कृष्ट नए शोध हासिल करने पर है। इसके पीछे देश के उच्च शिक्षण संस्थानों में शिक्षा-दीक्षा पद्धति की दिशा-दशा बदलने, इतिहास, कला, संस्कृति, साहित्य, धर्म, समाज, राजनीति जैसे विभिन्न विषयों के प्रति नई सोच विकसित करने का उद्देश्य है। यूजीसी को लंबे समय से शिकायत मिल रही थी कि सुविवि सहित देशभर के विश्वविद्यालयों में शोध कार्य पूरा नहीं होने के बावजूद शोधार्थी पीएचडी थीसिस सब्मिट नहीं करा रहे हैं, जबकि फैलोशिप लेते रहते हैं। इससे उच्च शिक्षा के क्षेत्र में नए शोध कार्यों की सोच को गहरा धक्का लगता है। इसलिए यूजीसी ने सख्त कदम उठाया है। उदयपुर के एमपीयूएटी में भी वसूली, प्रदेशभर से ये विवि
यूजीसी ने सुविवि के साथ आरयू जयपुर, जेएनवीयू जोधपुर, एमडीएस अजमेर, आरटीयू कोटा, कृषि विवि कोटा, वर्धमान महावीर ओपन कोटा, श्री करण नरेंद्र एग्रीकल्चर जोबनेर, एमपीयूएटी उदयपुर, जीजीटीयू बांसवाड़ा, राधाकृष्णन आयुर्वेद विवि जोधपुर, गंगा सिंह विवि बीकानेर, कृषि विवि बीकानेर, बृज विवि भरतपुर, शेखावाटी विवि सीकर, डॉ. भीमराव अंबेडकर विधि विश्वविद्यालय जयपुर आदि विश्वविद्यालयों को निर्देश जारी किए हैं। थीसिस जमा नहीं कराने के पीछे ये प्रमुख कारण


