राजधानी रांची में हो रहा ईस्ट जोन यूनिवर्सिटी फुटबॉल टूर्नामेंट खिलाड़ियों के लिए गौरव का अवसर होना चाहिए था। लेकिन डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय (डीएसपीएमयू) के खिलाड़ियों के लिए यह आयोजन अपमान, हताशा और व्यवस्था की बेरुखी का अनुभव बन गया। वे मैदान में उतरने के लिए तैयार थे, जर्सी पहनने का सपना देख रहे थे, डीएसपीएमयू का नाम लेकर परेड करना चाहते थे। पर उनके लिए यह सपना ही रह गया। वे मार्च पास्ट में नहीं चल सके, क्योंकि उनके पास मार्च पास्ट की ड्रेस ही नहीं थी। नियम के अनुसार, किसी भी खिलाड़ी को बिना यूनिफॉर्म के मार्च पास्ट में शामिल होने की इजाजत नहीं थी। ऐसे मौके पर किसी खिलाड़ी के लिए ड्रेस का न होना, सिर्फ कपड़े की ही कमी नहीं, पहचान की कमी का भी कारण बन गया। यह कमी विश्वविद्यालय प्रशासन ने ही पैदा की। बड़ा सवाल : स्पोर्ट्स फीस लेने के बावजूद छात्रों को ड्रेस क्यों नहीं? डीएसपीएमयू के खेल फंड में राशि की कमी नहीं है। विवि हर साल छात्रों से खेल शुल्क लेता है। फिर भी समय पर ड्रेस के लिए पैसे नहीं दिए गए। प्रशासनिक भवन में फूटा दर्द… खिलाड़ी बोले- हम तैयार थे, सिस्टम ने साथ नहीं दिया मंगलवार को खिलाड़ी डीएसपीएमयू के प्रशासनिक भवन छात्र नेता अमृत मुंडा के नेतृत्व में पहुंचे थे। कुलसचिव डॉ. धनंजय वासुदेव द्विवेदी और वित्त पदाधिकारी डॉ. अनीता मेहता के समक्ष अपनी व्यथा रखी। खिलाड़ियों ने बताया कि टूहमारे पास जज्बा था, मेहनत थी, लेकिन हमारे लिए सिस्टम में जगह नहीं थी। वहीं अधिकारियों ने बताया कि 50,000 रुपए जारी कर दिए गए हैं। और भी दिए जाएंगे, इसके लिए वीसी से बातचीत की जाएगी।


