भोपाल गैस त्रासदी के बाद दफन यूनियन कार्बाइड के जहरीले कचरे को पीथमपुर (इंदौर) में ही जलाने की तैयारी है। सोमवार को गैस राहत और पुनर्वास विभाग के निदेशक स्वतंत्र कुमार सिंह के नेतृत्व में मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और उनके क्षेत्रीय कार्यालयों के अधिकारियों ने कॉमन हैजर्ड्स वेस्ट ट्रीटमेंट, स्टोरेज और डिस्पोजल फैसिलिटी का दौरा किया। हाई कोर्ट के निर्देशों के बाद जहरीले कचरे के सुरक्षित निपटान की तैयारियों के चलते यह दौरा किया गया। इस बीच, दैनिक भास्कर की पड़ताल में सामने आया कि 2015 में जिस रामकी कंपनी (आर ई सस्टेनेबिलिटी लिमिटेड) के इंसीनरेटर में यूनियन कार्बाइड का 10 टन कचरा ट्रायल के तौर पर जलाया गया था। उससे सटे 50 बीघा खेत पूरी तरह बंजर हो चुके हैं। पास के नाले में अब भी दूषित लाल पानी आता है, जिसके कारण लोगों को स्किन इंफेक्शन, श्वांस संबंधी परेशानियां हो रही हैं। आठ किमी दूर तक के किसान अब भी पूरी फसल नहीं ले पा रहे हैं। खुद सरकार की अनावरी रिपोर्ट बता रही है कि फसलों का उत्पादन 98% तक घट गया है। भास्कर ने कंपनी के आसपास के 8 गांवों में एक्सपर्ट के साथ रिसर्च की। सामने आया कि कचरे के पहाड़ से जहरीला धुआं निकल रहा है। भास्कर एक्सपर्ट- यह पानी पीने तो दूर उपयोग के लायक भी नहीं यह पानी पीने का तो बहुत दूर किसी भी उपयोग में लेने लायक नहीं है। तय मानकों से पांच गुना तक ज्यादा खराबी होने से इस पानी से त्वचा रोग, गैस्टेंटराइटिस, अस्थमा, ह्रदय रोग, किडनी संबंधी रोग, कैंसर होने का खतरा सर्वाधिक है। पानी में घातक बैक्टेरिया भी हैं, जिससे पानी किसी भी स्थिति में पीने योग्य नहीं बचा है। इस पर तुरंत ध्यान देना होगा। – डॉ. स्नेहल दोंदे, चेयरमैन, क्लीन रिवर कमेटी एवं माइक्रोबायोलाॅजिस्ट सोसाइटी ऑफ इंडिया पानी में 5 गुना तक अधिक घातक केमिकल मिले 8 किमी दूर तक पहुंचा पानी… तेजाब जैसा असर, जहां से निकला वहां फसल जल गई 98% गिरा फसल उत्पादन… पीथमपुर के भू-अभिलेख विभाग से भास्कर ने पिछले 10 साल में पीथमपुर की खेती का रिकॉर्ड निकलवाया। इसमें खुलासा हुआ कि गेहूं, सोयाबीन, मक्का, चने का रकबा 2014-15 की तुलना में 75 से 98% तक गिरा है।


