यूनिवर्सिटी में RTI अपीलकर्ता और प्रोफेसर में मारपीट:बेटी का ट्रांसफर एडमिशन कराने किया था आवेदन, सुनवाई के दौरान हुई हाथापाई

सागर की डॉ. हरिसिंह गौर यूनिवर्सिटी में बुधवार दोपहर आरटीआई अपीलकर्ता और प्रोफेसर के बीच मारपीट हो गई। घटनाक्रम सामने आते ही विश्वविद्यालय परिसर में हंगामा मच गया। सुरक्षाकर्मी मौके पर पहुंचे और मामला शांत कराया। मामले में दोनों पक्षों ने सिविल लाइन थाने पहुंचकर शिकायत की है। शिकायत पर पुलिस कार्रवाई कर रही है। जानकारी के अनुसार, विकास सराफ निवासी सागर की बेटी उज्जैन के विक्रम विश्वविद्यालय में बीएएलएलबी की पढ़ाई कर रही हैं। वे उज्जैन कॉलेज से सागर के डॉ. हरिसिंह गौर यूनिवर्सिटी में ट्रांसफर एडमिशन कराना चाहते हैं। जिसको लेकर उन्होंने विश्वविद्यालय में आवेदन दिया। लेकिन सुनवाई नहीं हुई। जिसके बाद विकास सराफ ने आरटीआई लगाई और पीएमओ ऑफिस में शिकायत की। आरटीआई का जवाब नहीं मिलने पर उन्होंने प्रथम अपीलीय अधिकारी के सामने अपील पेश की। सुनवाई के दौरान हाथापाई
अपील पर बुधवार को सुनवाई थी। सुनवाई के दौरान अपीलकर्ता विकास सराफ अपीलीय अधिकारी के सामने पेश हुए। वहीं विश्वविद्यालय के लॉ विभाग प्रभारी प्रोफेसर हिमांशु पांडेय भी उपस्थित हुए। इसी दौरान प्रोफेसर और विकास सराफ के बीच कहासुनी हुई। कहासुनी बढ़ी और गालीगलौज के साथ मारपीट शुरू हो गई। विवाद होते देख मौके पर मौजूद स्टाफ और सुरक्षाकर्मियों ने बीचबचाव कर मामला शांत कराया। मामले में दोनों पक्षों ने सिविल लाइन थाने में शिकायत की है। एडमिशन के लिए बना रहे थे दबाव
लॉ विभाग प्रभारी प्रोफेसर हिमांशु पांडेय ने बताया कि अपीलकर्ता विकास सराफ की बेटी उज्जैन के कॉलेज में लॉ की पढ़ाई कर रही हैं। उन्होंने बेटी का ट्रांसफर एडमिशन सागर विश्वविद्यालय में कराने के लिए आवेदन दिया था। मैंने जुलाई 2025 में विभाग का प्रभार संभाला। फाइल मेरे पास आई। लेकिन नियम नहीं होने से एडमिशन नहीं किया गया। वह लगातार एडमिशन करने के लिए दबाव बना रहे थे। इसके बाद उन्होंने आरटीआई लगाई। आज आरटीआई की सुनवाई थी। सुनवाई के दौरान मैंने अपने विभाग का पक्ष रख रहा था। तभी विकास सराफ ने गालगीलौज कर मारपीट शुरू कर दी। सीटें खाली फिर भी एडमिशन नहीं किया
आरटीआई अपीलकर्ता विकास सराफ ने बताया कि सागर विश्वविद्यालय में बेटी का ट्रांसफर एडमिशन के लिए आवेदन किया था। सीटें खाली हैं। लेकिन एडमिशन नहीं हो रहा है। आरटीआई लगाई और पीएमओ ऑफिस में शिकायत की। सुनवाई नहीं होने पर प्रथम अपीलीय अधिकारी के पास अपील की। आज सुनवाई के लिए बुलाया गया। जहां मैं अपने दस्तावेजों की बात कर रहा था। लेकिन प्रोफेसर ने अपने बचाओ में मुझ पर आरोप लगाना शुरू कर दी। गालीगलौज करने लगे। मना किया तो मारपीट शुरू कर दी। बचाओ में मैंने भी मारा। हमारी झूमाझटकी हुई आपस में। मामले में थाने में शिकायत की है।

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