यूपीएस- फ्रिज से पहले कमीशन के लिए खरीदे रीएजेंट:खरीदी अनिमितता की 385 दिन पहले कराई गई थी जांच, पर उसकी रिपोर्ट दबा दी गई

स्वास्थ्य विभाग के 350 करोड़ से ज्यादा के रीएजेंट घोटाले में एक और खुलासा हुआ है। रीएजेंट खरीदी मामले में सबसे पहली जांच संचालक स्वास्थ्य ने 12 जनवरी 2024 में की थी, लेकिन यह रिपोर्ट शासन स्तर पर दबा दी गई। अब जांच का जिम्मा एंटी करप्शन ब्यूरो(एसीबी) के हाथ में जाने के बाद यह रिपोर्ट फिर सामने आई है। इस रिपोर्ट में स्वास्थ्य सेवाओं के तत्कालीन संचालक ऋतुराज रघुवंशी ने 7 सदस्यों की कमेटी बनाई थी, जिसने साफ लिखा था कि सीजीएमएससी ने रीएजेंट खरीदी में बड़ी अनियमितता की है। पहले खून को मिलाने के लिए सेंट्रीफ्यूज मशीन, रीएजेंट खराब न हो इसके लिए रेफ्रिजरेटर और बिजली के लिए यूपीएस खरीदना था। अंत में रीएजेंट खरीदी की जानी थी, पर कमीशन के कारण सबसे पहले रीएजेंट खरीदा गया। यही नहीं पहली खेप की रिपोर्ट डीएचएस (संचालक स्वास्थ्य सेवाएं) को भेजनी थी। उसकी समीक्षा के बाद दूसरी खेप का ऑर्डर दिया जाता। इसमें लगभग चार से छह महीने का समय लगता। लेकिन डीएचएस को बताए बगैर 27 दिन में ही दूसरी खेप की खरीदी कर ली गई। चाइनीज मशीनों की सप्लाई की थी मोक्षित ने
खून जांचने के लिए सीएजीएमएसी ने मोक्षित इंटरप्राइजेज से मशीनों की खरीदी की। इसके लिए दो प्रकार की मशीनें आती हैं। पहली ओपन दूसरी क्लोज। ओपन में किसी भी तरह का रीएजेंट लगाया जा सकता है, जबकि क्लोज में सिर्फ उसी कंपनी का रीएजेंट लगता है​ जिसकी मशीन होती है। मोक्षित ने चाइनीज कंपनी की मशीनों पर चंदा कंपनी का लेवल लगाकर सप्लाई कर दी। ये मशीनें ओपन थी, लेकिन इन्हें क्लोज बताया गया। यही वजह थी कि सीजीएमएससी ने 10 साल तक के लिए रीएजेंट का अनुबंध मोक्षित से कर लिया। ऐसे पहली बार पकड़ में आया मोक्षित सीजीएमएसी के तत्कालीन एमडी चंद्रकांत वर्मा ने दो बार में 27 दिन के अंदर 350 करोड़ के रीएजेंट मोक्षित इंटरप्राइजेज से खरीद लिए। इसके भुगतान के लिए जब फाइल डीएचएस पहुंची, तो वहां बजट समीक्षा की गई। 2022-23 के अनुपूरक में केवल 260 करोड़ रुपए ही बचे थे। ऐसे में बाकी भुगतान कैसे किया जाए, इस पर सवाल उठा। 15वें वित्त में 45 करोड़ रुपए थे, उसके बावजूद राशि पूरी नहीं हो पाई तो जांच के निर्देश दिए गए कि बजट से अधिक की खरीदी क्यों और किस परिस्थिति में हुई। रिपोर्ट के प्रमुख पांच बिंदु ​​​​​​​सीधी बात – श्याम बिहारी जायसवाल, स्वास्थ्य मंत्री छत्तीसगढ़ जांच संक्षिप्त ​थी, हमने केस एसीबी को सौंपा सालभर पहले डीएचएस डायरेक्टर ने रीएजेंट की जांच कराई थी, उस रिपोर्ट पर कार्रवाई क्यों नहीं की?
जवाब- जांच समकक्ष अधिकारी ने की थी, इस कारण मामले में कोई कार्रवाई नहीं की गई। रिपोर्ट में भारी अनिमितता की बात सामने आई थी?
जवाब- यह जांच संक्षिप्त थी। इसलिए मैंने एक वृहद जांच के लिए लिखा। जब जांच में बड़े घोटाले की बात सामने आई तब हमने मामला एसीबी को सौंप दिया।

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