यूपी भाजपा को जनवरी में मिलेगा नया अध्यक्ष:सभी जिलों के जिलाध्यक्ष भी बदलेंगे, योगी की मौजूदगी में दिल्ली में हुई बड़ी बैठक

यूपी भाजपा में जल्द ही संगठन स्तर पर बड़ा फेरबदल होने वाला है। जनवरी के तीसरे सप्ताह तक नया प्रदेश अध्यक्ष मिल जाएगा। साथ ही पार्टी 98 संगठनात्मक जिलों में जिलाध्यक्ष की नियुक्ति भी 15 जनवरी तक कर देगी। लगातार दो बार जिलाध्यक्ष रहे को तीसरी बार जिलाध्यक्ष नहीं बनाया जाएगा। संगठन चुनाव को लेकर रविवार को दिल्ली में पार्टी की बैठक हुई, जिसमें इन चुनावों को लेकर चर्चा हुई। पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा, संगठन महामंत्री बीएल संतोष के अलावा सभी राष्ट्रीय महासचिव और संगठन चुनाव प्रभारी, सह प्रभारी मौजूद रहे। इसके अलावा राज्यों से प्रदेश अध्यक्ष, संगठन मंत्री और चुनाव अधिकारी भी बैठक में शामिल हुए। बैठक में सीएम योगी, दोनों डिप्टी सीएम केशव मौर्य और ब्रजेश पाठक, यूपी भाजपा अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी और महामंत्री धर्मपाल सिंह भी मौजूद रहे। बैठक में सबसे पहले पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह को श्रद्धांजलि दी गई। इसके बाद पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्‌डा ने बैठक में मौजूद लोगों को संबोधित किया। भाजपा सूत्रों के मुताबिक, 20 दिसंबर तक मंडल अध्यक्ष चुनाव पूरा होना था। लेकिन, एक-एक मंडल पर मंथन में ज्यादा समय लगने से अभी तक सभी 1819 मंडलों में निर्णय नहीं हुआ है। अब जानिए दौड़ में कौन? भाजपा क्यों सौंप सकती है प्रदेश की कमान अमरपाल मौर्य पिछड़े वर्ग में पार्टी के प्रदेश महामंत्री और राज्यसभा सदस्य अमरपाल मौर्य ने लखनऊ से लेकर दिल्ली तक दावेदारी पेश की है। अमरपाल ने पूर्व केंद्रीय मंत्री उमा भारती के सहयोगी के रूप में भाजपा में राजनीति शुरू की थी। केशव प्रसाद मौर्य की टीम में पहली बार प्रदेश मंत्री बने। उसके बाद महेंद्रनाथ पांडेय की टीम में भी रहे। स्वतंत्र देव सिंह और भूपेंद्र सिंह चौधरी की टीम में भी प्रदेश महामंत्री हैं। ऊंचाहार से विधानसभा चुनाव हारने के बाद भी पार्टी ने उन्हें राज्यसभा में भेजा। क्यों बन सकते हैं? : अमरपाल मौर्य डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के करीबी हैं। प्रदेश महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह से भी उनकी नजदीकी है। अमरपाल की डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक के खेमे में भी अच्छी खासी पकड़ है। लोकसभा चुनाव के बाद भाजपा मौर्य समाज को साधने का प्रयास कर रही है। मौर्य, सैनी, शाक्य, कुशवाहा, काछी, माली, सैनी समाज की आबादी 4 फीसदी से अधिक है। केंद्रीय मंत्री बीएल वर्मा बसपा छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे। ओबीसी मोर्चा के पदाधिकारी भी रहे हैं। बीएल वर्मा लगातार दूसरी बार केंद्र सरकार में मंत्री हैं। क्यों बन सकते हैं?: पूर्व सीएम कल्याण सिंह के निधन के बाद बीएल वर्मा ही लोध समाज के बड़े नेता हैं। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के करीबी हैं। लोध समाज भाजपा का वोट बैंक माना जाता है। लेकिन सपा लगातार इसमें सेंधमारी का प्रयास कर रही है। बीएल वर्मा को प्रदेश अध्यक्ष बनाने से पिछड़े वर्ग में पकड़ बनाने में मजबूती मिलेगी। प्रदेश में पिछड़े वर्ग में लोध समाज की आबादी 4.90 फीसदी से ज्यादा है। बाबूराम निषाद भाजपा के राज्यसभा सदस्य हैं। भाजपा के प्रदेश पदाधिकारी भी रहे हैं। क्यों बन सकते हैं? लोकसभा चुनाव में निषाद वोट बैंक भाजपा से सपा को शिफ्ट हुआ। भाजपा लगातार निषाद समाज में फिर पकड़ बनाने का प्रयास कर रही है। बाबूराम निषाद को अध्यक्ष बनाने से निषाद वोट के लिए निषाद पार्टी पर निर्भरता कम होगी। केवट, मल्लाह, निषाद समाज की आबादी 4.35 प्रतिशत से ज्यादा है। प्रकाश पाल कानपुर क्षेत्र के क्षेत्रीय अध्यक्ष हैं। लंबे समय से आरएसएस से जुड़े रहे हैं। क्यों बन सकते हैं?: पाल समाज को बीजेपी का वोट बैंक माना जाता है। अभी तक पार्टी ने पाल नेताओं को बड़ा पद नहीं दिया है। सपा ने पाल बिरादरी से प्रदेश अध्यक्ष बनाया है। पाल, गढ़रिया समाज को साधने में मदद मिलेगी। प्रदेश में पाल, गढ़रिया और बघेल समाज की आबादी 4.5 फीसदी है। विनोद सोनकर कौशांबी के पूर्व सांसद विनोद सोनकर भी प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए ताकत लगा रहे हैं। कौशांबी के पूर्व सांसद हैं। पार्टी में राष्ट्रीय मंत्री भी रहे हैं। क्यों बन सकते हैं? सोनकर समाज भाजपा का बड़ा वोट बैंक है। लेकिन समाज को सरकार या संगठन में कोई बड़ा पद नहीं मिला है। योगी कैबिनेट में एक भी सोनकर मंत्री नहीं है। वहीं, प्रदेश संगठन में भी प्रदेश अध्यक्ष, महामंत्री, उपाध्यक्ष या क्षेत्रीय अध्यक्ष सोनकर नहीं हैं। दलित वर्ग में सोनकर समाज की आबादी अच्छी है। हरीश द्विवेदी हरीश द्विवेदी बस्ती से दो बार सांसद रहे हैं। पार्टी के राष्ट्रीय मंत्री के साथ असम के प्रभारी भी हैं। क्यों बन सकते हैं? प्रदेश में ब्राह्मण वोट बैंक करीब 12 फीसदी है। बीते कुछ समय से ब्राह्मण भाजपा से नाराज भी रहा है। इसका असर लोकसभा चुनाव में भी देखने को मिला। लगातार दो बार से पिछड़े समाज को प्रदेश अध्यक्ष की कमान सौंपी जा रही है। जबकि एक बार ब्राह्मण और एक बार अन्य जाति की परंपरा रही है। डॉ. दिनेश शर्मा पूर्व डिप्टी सीएम हैं। राज्यसभा सदस्य भी हैं। लगातार दो बार लखनऊ के महापौर और भाजपा के संगठन चुनाव के राष्ट्रीय प्रभारी भी रहे हैं। आरएसएस और भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व के करीबी हैं। क्यों बन सकते हैं? यूपी में भाजपा के ब्राह्मण चेहरे हैं। डिप्टी सीएम पद से हटने के बाद से ब्राह्मण समाज में काफी सक्रिय भी है। इसी वजह से पार्टी ने उन्हें राज्यसभा में भी भेजा। विद्यासागर सोनकर विद्यासागर सोनकर भाजपा के प्रदेश महामंत्री रहे हैं। एमएलसी हैं। पूर्व सांसद भी हैं। क्यों बन सकते हैं? विद्यासागर 2019 और 2022 में भी प्रदेश अध्यक्ष पद के प्रबल दावेदार थे। सोनकर समाज के बड़े नेता हैं। भाजपा और आरएसएस में भी गहरी पकड़ है। सोनकर वोट बैंक को साधने के लिए बीजेपी दांव खेल सकती है। कई ब्राह्मण और दलित नेता भी कतार में
भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष बनने के लिए पार्टी के कई ब्राह्मण नेता भी कतार में लगे हैं। राज्यसभा सदस्य डॉ. दिनेश शर्मा, कन्नौज के पूर्व सांसद सुब्रत पाठक, मथुरा विधायक श्रीकांत शर्मा, प्रदेश उपाध्यक्ष विजय बहादुर पाठक भी दौड़ में शामिल हैं। पार्टी के कुछ नेता कयास लगा रहे हैं कि चुनाव प्रभारी महेंद्रनाथ पांडेय को ही एक बार फिर संगठन की कमान सौंपी जा सकती है। वहीं, पूर्व सांसद रमाशंकर कठेरिया, प्रदेश महामंत्री प्रियंका रावत, एमएलसी लालजी निर्मल और एससी मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष रामचंद्र कनौजिया सहित अन्य दावेदार भी हैं। —————– ये भी पढ़ें… राजनाथ बोले- मैं किसी प्रधानमंत्री की बुराई नहीं करता:PM एक संस्था; योगी डायनामिक CM, धार्मिक काम में बाधा नहीं आने दी लखनऊ में राजनाथ सिंह ने कहा- मैं किसी प्रधानमंत्री की बुराई नहीं करता हूं, क्योंकि प्रधानमंत्री एक संस्था है। योगी आदित्यनाथ डायनामिक चीफ मिनिस्टर हैं। उन्होंने यूपी में किसी भी धार्मिक काम में बाधा नहीं आने दी। रक्षा मंत्री ने कहा- राजीव गांधी ने कहा था कि वह 100 रूपए भेजते हैं तो 14 रुपए ही नीचे (आम आदमी तक) पहुंचता है, लेकिन मोदी सरकार ने डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर स्कीम लागू की। अब पूरा 100 रुपए आम आदमी तक पहुंच रहा। रक्षा मंत्री बुधवार को लखनऊ में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के जन्म शताब्दी समारोह में बोल रहे थे। इस दौरान उन्होंने पीएम मोदी की खूब तारीफ की। पढ़ें पूरी खबर… 28 दिसंबर को दिल्ली गए थे सीएम योगी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शनिवार को 2 दिवसीय दौरे पर नई दिल्ली गए थे। शनिवार शाम को उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, मिजोरम के राज्यपाल जनरल वीके सिंह और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्‌डा से मुलाकात की थी। योगी ने सभी को 13 जनवरी से शुरू हो रहे महाकुंभ में आने का न्योता दिया था। योगी ने निमंत्रण पत्र के साथ महाकुंभ- 2025 के लोगो वाला प्रतीक चिह्न, कलश, महाकुंभ से जुड़ा साहित्य, नए साल का टेबल कैलंडर और डायरी भी भेंट की थी। शनिवार को योगी ने सबसे पहले मिजोरम के राज्यपाल जनरल (रिटायर्ड) वीके सिंह से यूपी सदन में शिष्टाचार भेंट कर उन्हें आमंत्रित किया। इसके बाद पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से भी उनके सरकारी आवास पर भेंट की। इसके बाद योगी गृहमंत्री अमित शाह, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और फिर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मिलने उनके सरकारी आवास पर पहुंचे थे। रामनाथ कोविंद ने योगी से मुलाकात की तस्वीर को शेयर करते हुए X पर लिखा था- आज उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मेरे आवास पर मुझसे मिलने आए। उन्होंने मुझे आगामी महाकुंभ, एक भव्य आध्यात्मिक उत्सव में आमंत्रित किया। इसके सफल आयोजन के लिए मेरी शुभकामनाएं। वहीं जनरल वीके सिंह ने X पर लिखा था- आज उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात हुई। उन्होंने महाकुंभ का निमंत्रण दिया। 13 जनवरी से शुरू हो रहा है महाकुंभ
प्रयागराज में 13 जनवरी से महाकुंभ का शुभारंभ हो रहा है। यह महाशिवरात्रि तक चलेगा। इस आयोजन को शासन-प्रशासन भव्य रूप देने में जुटा है। अब तैयारियां अंतिम चरण में हैं। आयोजन को लेकर सभी व्यवस्थाएं कर ली गई हैं। इसे लेकर देशभर के लोगों को न्योता भेजा जा रहा है। अब तक योगी सरकार कई राज्यों के राज्यपाल, केंद्रीय मंत्रियों और मुख्यमंत्रियों समेत तमाम गणमान्य लोगों को न्योता दे चुकी है। इनमें छत्तीसगढ़ के सीएम विष्णुदेव साय, मध्यप्रदेश के सीएम मोहन यादव, बिहार के सीएम नीतीश कुमार, पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव, तेलंगाना के सीएम रेवंत रेड्डी के साथ तमाम दिग्गजों को न्योता दिया गया है। सरकार ने कुंभ के प्रचार के लिए रोड शो भी किया। महाकुंभ के प्रचार-प्रसार पर कुल 121 करोड़ रुपए खर्च करने का प्रस्ताव तैयार किया गया था। 50 शहरों से चलेंगी महाकुंभ स्पेशल ट्रेनें
महाकुंभ के दौरान रेलवे सिक्योरिटी के लिए जो कंट्रोल रूम बनाए गए हैं, वो डिस्ट्रिक्ट कंट्रोल रूम से जुड़े होंगे। इसके अलावा महाकुंभ के दौरान 8000 RAF के अतिरिक्त जवान तैनात किए जाएंगे। वहीं, अलग-अलग भाषा बोलने वाले विभिन्न राज्यों से सिक्योरिटी बुलाई जाएगी। महाकुंभ के दौरान देशभर के 50 शहरों से महाकुंभ स्पेशल ट्रेनें प्रयागराज आएंगी। महाकुंभ में एक दिन में 20 लाख यात्री रेल के माध्यम से प्रयागराज पहुंचेंगे। इस दौरान भीड़ नियंत्रित करने के लिए 9 स्टेशनों का चयन किया गया है, जो सीधे-सीधे त्रिवेणी संगम से जुड़ेंगे। हर दिन आएंगे 20 लाख श्रद्धालु
महाकुंभ में रेलवे के लिए सबसे बड़ा चैलेंज सिक्योरिटी को मैनेज करना होगा। इसे ध्यान में रखते हुए रेलवे स्टेशनों पर एक दिन में करीब 20 लाख की आने वाली भीड़ की सीसीटीवी से निगरानी की जाएगी। इसके लिए 1313 सीसीटीवी लगाए गए हैं। रेलवे स्टेशन के अंदर आने वाले हर व्यक्ति पर RPF के जवानों की कड़ी नजर होगी। इसके अलावा स्टेशनों के आसपास के मुख्य चौराहों पर भी सीसीटीवी से निगरानी रखी जा रही है। यह कंट्रोल रूम सीधे डिस्ट्रिक्ट कंट्रोल रूम से कनेक्ट रहेंगे। ——————————— यह खबर भी पढ़ें अखिलेश यादव में दम है तो कुंदरकी से चुनाव लड़ें, BJP विधायक बोले- मुझे प्रशासन ने नहीं, यादव-मुस्लिमों ने जिताया मुरादाबाद के कुंदरकी से BJP विधायक ने सपा मुखिया अखिलेश यादव को चुनौती दी है। विधायक रामवीर सिंह ठाकुर ने कहा- अखिलेश यादव को अगर लगता है कि मुस्लिम मतदाता उनके साथ हैं तो मैं इस्तीफा देने को तैयार हूं वो मेरे खिलाफ चुनाव लड़कर दिखाएं। यहां पढ़ें पूरी खबर

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