मेरठ में STF ने इटली मेड के एक हजार 975 कारतूस बरामद किए हैं। 12 बोर के ये कारतूस राणा इंस्टीट्यूट ऑफ शूटिंग स्पोर्ट्स शूटिंग रेंज से लाए गए थे। देहरादून की ये शूटिंग रेंज पद्मश्री इंटरनेशनल शूटर जसपाल राणा की है। दरअसल, मेरठ STF ने मंगलवार दोपहर एक स्विफ्ट कार को पकड़ा। तलाशी में कारतूस मिले। कार ड्राइवर राशिद ने बताया, यह कारतूस सुभाष राणा और सक्षम मलिक ने इंस्टीट्यूट ऑफ शूटिंग स्पोर्टस (RIS) देहरादून से उसे दिए थे। मेरठ में डिलीवरी करनी थी, लेकिन उससे पहले पकड़ा गया। अब पूरा मामला सिलसिलेवार पढ़िए… स्विफ्ट डिजायर से पकड़े गए कारतूस
मेरठ STF के SP बृजेश कुमार सिंह ने बताया- मंगलवार दोपहर को एसडी ग्लोबल हास्पिटल के पास चाहत नर्सरी से ग्रेटर पल्लवपुरम को जाने वाले रास्ते पर एक स्विफ्ट डिजायर को पकड़ा गया। टीम ने कार की तलाशी ली। 12 बोर के कारतूस कई पैकेट में भरे हुए थे। कार ड्राइवर बुढ़ाना के जौला गांव निवासी राशिद चला रहा था। उसने बताया कि यह कारतूस सुभाष राणा एवं सक्षम मलिक ने इंस्टीट्यूट ऑफ शूटिंग स्पोर्टस (RIS) देहरादून से उसको दिए थे। जब STF ने सुभाष और सक्षम की मोबाइल लोकेशन ट्रेस की, तो वह शूटिंग रेंज में मिली। अब एक टीम देहरादून में धरपकड़ के लिए जा रही है। सुभाष राणा शूटर जसपाल राणा का भाई बताया जा रहा है। माना जा रहा है कि शूटिंग रेंज से कारतूस निकालकर संजीव जीवा के गैंग तक पहुंचाए जा रहे थे। इसके बीच की कड़ी अनिल बंजी गैंग को माना जा रहा है। संजीव जीवा गैंग से जुड़े तार
STF मान रही है कि ये कारतूस संजीव जीवा गैंग तक पहुंचाने की डील थी। STF ने संजीव गैंग को हथियार सप्लाई देने वाले तस्कर अनिल बालियान उर्फ अनिल बंजी को 20 दिसंबर, 2024 को गिरफ्तार कर लिया था। अनिल से ही शामली पुलिस ने एके-47 बरामद की थी। ये वही एके-47 थी, जो संजीव जीवा से खरीदी गई थी। ऐसे सप्लाई होते थे लाइसेंसी हथियार
गन हाउस पर नए हथियारों के अलावा ऐसे पुराने हथियार भी होते हैं, जिनको लाइसेंस होल्डर सरेंडर कर देते हैं। अगर किसी लाइसेंस होल्डर की मौत हो गई और उसके परिवार वालों ने लाइसेंस नहीं बनवाया तो उसे परमिशन लेकर गन हाउस पर बेच दिया जाता है। बहुत से लोग हथियार पुराने होने की वजह से बेच देते हैं। नए लाइसेंस वाले लोग अमूमन नए हथियार ही लेते हैं। ऐसे में गन हाउस पर पुराने काफी हथियार होते हैं। अनिल बंजी ऐसे ही गन हाउस से सांठ-गांठ करके इन हथियारों को 40 से 50 हजार रुपए प्रति बन्दूक तथा 100 रुपए प्रति कारतूस (315 बोर) खरीदता था। इसके बाद इन बंदूकों को यह लोग 80 हजार से 1 लाख में और कारतूस को 200 से 250 रुपए में बेच देते थे। गन हाउस का मालिक अनिल को असलहा व कारतूस किसी अन्य व्यक्ति के नाम से फर्जी रसीद काटकर देता था। वह फर्जी रसीदें अनिल बालियान अपने पास रखता था। फिर इन हथियारों को प्रोफेशनल बदमाशों को बेचा जाता था। ………………….. यह भी पढ़े : मथुरा में महिला अफसर 70 हजार रिश्वत लेते गिरफ्तार: विजिलेंस ने घर से पकड़ा; 45 मिनट बंद कमरे में पूछताछ की मथुरा में महिला PCS किरण चौधरी को विजिलेंस टीम ने मंगलवार को गिरफ्तार कर लिया। इस दौरान विजिलेंस टीम की महिला SP ने ट्रैप कर किरण चौधरी को 70 हजार रुपए लेते रंगे हाथों पकड़ा। विजिलेंस टीम को शिकायत मिली थी कि DPRO किरण चौधरी काम करने के एवज में रिश्वत मांग रही हैं। इसके बाद टीम ने पूरी प्लानिंग के साथ उनके घर पर छापेमारी की। सुबह 11 बजे लखनऊ से विजिलेंस टीम इंद्रप्रस्थ कॉलोनी स्थित किरण चौधरी के घर पहुंची। उनको कार में बैठाकर ले गई। पढ़िए पूरी खबर…


