यूरोप में स्टूडेंट लोन में गारंटर बनती है सरकार, हमारे यहां क्यों नहीं

यूरोपियन देशों और यूएस में सरकार स्टूडेंट्स को आरक्षण देने में भरोसा नहीं करती है। वहां की सरकार उनकी शिक्षा में आर्थिक रूप से मदद देती है। स्टूडेंट केवल अपने पसंदीदा कॉलेज में एडमिशन लेते हैं। उनके लिए स्टूडेंट लोन में सरकार गारंटर बनती है। जबकि भारत में ऐसा नहीं है। यहां स्टूडेंट लोन में गारंटर की भूमिका सरकार नहीं निभाती है। यहां केवल आरक्षण को बढ़ावा दिया जाता है। इस तरह के महत्वपूर्ण पहलू यूकेपी में आयोजित ग्वालियर कॉन्क्लेव: लीगल रिफोर्मस में निकलकर सामने आए। यह कॉन्क्लेव सोमवार को फ्रेंड्स ऑफ हार्वर्ड आैर हॉवर्ड एल्यूमिनाई की ओर से आयोजित की गई। जिसमें जस्टिस आनंद पाठक, जस्टिस अनिल वर्मा, जस्टिस मिलिंद रमेश फड़के, जस्टिस आरसी वार्ष्णेय, जस्टिस आरके वाणी ने अपने विचार प्रस्तुत किए। इस अवसर पर सिटी बैंक लॉस एंजिल्स के सीनियर वाइस प्रेसीडेंट अमन अग्रवाल और अंकुर मोदी उपस्थित रहे। वहीं हार्वर्ड विवि से आए स्टूडेंट्स केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया से भी मिले।

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