देहरादून में दो कश्मीरी युवकों को नाम-पता पूछकर पीटा गया। नाबालिग दुकान में नमकीन का पैकेट खरीदने गए थे। युवकों की भाषा और उनके पहनावे को देखकर दुकान के पास बैठे कुछ युवकों ने उनसे उनका नाम और उनका पता पूछा। जैसे ही उन्होंने ने बताया कि वह कश्मीर के रहने वाले हैं तो युवक भड़क गए। युवकों ने कहा कि तुमने पहलगाम में हमारे लोगों को मारा है और अब तुम्हें बताएंगे। इसके बाद उनकी पिटाई कर दी। हमलावरों ने कहा- ये कश्मीर नहीं है, यहां कश्मीरी नहीं चलेगी। इनको जिन्दा मार दो। पीड़ित दानिश ने बताया कि वे लोग कह रहे थे कि ये मुस्लिम हैं। इन्हें मारो। घटना मंगलवार शाम थाना विकास नगर क्षेत्र में चौकी बाजार के पास की है। इस पूरी घटना में एक कश्मीरी युवक की हालत नाजुक है, उसका हाथ फ्रैक्चर हो गया है, जबकि सिर में गंभीर चोटें आई हैं। विकास नगर क्षेत्र के CO भास्कर लाल शाह ने कहा कि इस मामले में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और जिस दुकान पर यह घटना हुई उसे दुकानदार से पूछताछ की जा रही है। पहली बार आया था देहरादून कश्मीरी युवक ने बताया कि मंगलवार शाम को वह दोस्तों के साथ दुकान पर गया था। वहां कुछ युवक आए और पता पूछने के बाद गालियां देकर मारपीट करने लगे। हमने कहा कि हम सिर्फ शॉल बेचने आए थे। उन्होंने बताया कि पहली बार उत्तराखंड आया था। हम दुकान से सामान खरीद रहे थे और वहां कुछ युवक आए उन्होंने कहा कि ये मुस्लिम इसे मारो, इसे खत्म कर दो। इस दौरान पुलिस से मदद मांगी गई लेकिन पुलिस ने मदद नहीं की। उसने बताया कि वे लोग हिमाचल के पांवटा साहिब से देहरादून शॉल बेचने आए थे। आरोपियों ने हमसे कहा कि ये कश्मीर नहीं है। यहां कश्मीर नहीं चलेगी। पवन खेड़ा बोले- कश्मीरी हिंसा का सामना करते इम मामले को लेकर कांग्रेस पार्टी के प्रवक्ता पवन खेड़ा ने X पर लिखा यह विरोधाभास चौंकाने वाला है। यही कश्मीरी शॉल पीएम और उनके करीबी लोगों के कंधों पर सार्वजनिक मंचों पर संस्कृति और विरासत के प्रतीक बनकर दिखाई देती हैं। कश्मीरी कारीगरी की प्रशंसा होती है, कश्मीरी सौंदर्य को अपनाया जाता है। लेकिन उस कारीगरी के पीछे खड़े लोग, बुनकर और विक्रेता- गरिमा, सुरक्षा और सम्मान से वंचित रह जाते हैं। यह कैसा संदेश देता है? कश्मीरी सुंदरता की कीमत है। कश्मीरी श्रम उपयोगी है। लेकिन कश्मीरी जिंदगियां महत्वहीन समझी जाती हैं। और फिर हमसे कहा जाता है कि “कश्मीर अब सामान्य है”, जबकि हकीकत यह है कि भारत में कहीं भी कश्मीरी होना ही असामान्य बना दिया गया है। एसोसिएशन बोला- लोहे की रॉड और घूंसे बरसाए जम्मू एंड कश्मीर स्टूडेंट एसोसिएशन के अनुसार, हमलावरों ने पहले युवक से उसकी पहचान को लेकर पूछताछ की। जब उन्हें पता चला कि परिवार कश्मीर से है और मुस्लिम समुदाय से संबंध रखता है, तो विवाद बढ़ गया और हमला किया गया। संगठन का आरोप है कि युवक को लोहे की रॉड से मारा गया, घूंसे बरसाए गए और परिवार के अन्य सदस्यों को भी घसीटकर थप्पड़ मारे गए। हमले के बाद घायल युवक को पहले स्थानीय अस्पताल ले जाया गया, जहां से हालत गंभीर होने पर देहरादून के दून अस्पताल रेफर किया गया। JKSA के मुताबिक, युवक के सिर से खून बह रहा था और शरीर पर कई जगह चोटों के निशान थे। JKSA की आरोपियों के खिलाफ सख्त धाराओं में FIR की मांग JKSA ने इस घटना को सांप्रदायिक प्रोफाइलिंग और भीड़ द्वारा की गई हिंसा करार दिया है। संगठन ने उत्तराखंड के सीएम पुष्कर सिंह धामी से मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है। साथ ही आरोपियों के खिलाफ सख्त धाराओं में FIR दर्ज कर कड़ी कानूनी कार्रवाई की अपील की है। संगठन ने कहा कि इस तरह की घटनाओं पर सख्ती जरूरी है, ताकि मेहनत-मजदूरी कर जीवनयापन करने वाले कमजोर वर्गों के खिलाफ नफरत और हिंसा पर स्पष्ट संदेश दिया जा सके। —————— ये खबर भी पढ़ें… भाई को बचाने के लिए भिड़ा था ऐंजल चकमा: दोस्त बोला- देहरादून पुलिस ने शिकायत नहीं लिखी, माइकल को लाने के लिए कहा गया देहरादून की जिज्ञासा यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले त्रिपुरा के छात्र ऐंजल चकमा अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ने के बाद मौत हो गई। ऐंजल कुछ ही दिनों में हाई पैकेज की नौकरी जॉइन करने वाला था और प्लेसमेंट को लेकर बेहद खुश था। वो पढ़ाई में इतना होशियार था की उसने एक ही दिन में तीन इंटरव्यू पास किए थे। (पढ़ें पूरी खबर)


