ये कैसी नहर…?:ठेकेदार को 61.79 करोड़ रुपए यानी 93% हुआ भुगतान, लेकिन 7 साल बाद भी 40% किसानों को पानी नहीं मिला

हरसी उच्च स्तरीय नहर परियोजना को पानी उपलब्ध कराने के लिए 2018 में शुरू की गई योजना 2025 में भी अधूरी है। इसका टेंडर 72.30 करोड़ रुपए था और भारती द्वारिकाधीश माइक्रो जेवीसी मैसर्स भारती बिल्डकॉन एवं द्वारिकाधीश कंस्ट्रक्शन कंपनी ने 65.40 करोड़ में काम पूरा करने का अनुबंध किया था। इसका काम 24 माह यानी 2020 तक पूरा होना था, लेकिन 7 साल बाद भी योजना अधूरी है। काम पूरा नहीं करने पर जल संसधन विभाग को ठेकेदार पेनॉल्टी लगानी चाहिए थी लेकिन विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत के चलते योजना अधूरी होने के बावजूद ठेकेदार को 61.79 करोड़ रुपए का भुगतान कर दिया गया। यही नहीं ठेकेदार को 7.55 करोड़ रुपए एक्सलेशन का भुगतान भी कर दिया गया। जल संसाधन विभाग ने नरवर से हरसी बांध को फीडर कैनाल से पानी देने के लिए मोहिनी पिकअप वियर से 5.25 किलोमीटर लंबी फीडर कैनाल के निर्माण की योजना 2018 में शुरू की थी। इस योजना के पूरा होने पर ग्वालियर और भिंड के किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध कराया जाना था। लेकिन अब तक कोई भी महत्वपूर्ण काम पूरा नहीं हुआ। 2014 में सिंचाई के लिए पानी की कमी पड़ने पर दो प्रस्ताव पर हुई थी चर्चा
2014 में कम बारिश के कारण हरसी उच्च स्तरीय नहर में सिंचाई के लिए पानी की भारी कमी हो गई थी। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में इस समस्या पर चर्चा की गई और दो प्रस्तावों पर विचार किया गया: एक, हरसी बांध से नहर में पानी लिफ्ट करना और दूसरा, हरसी फीडर नहर से उच्च स्तरीय नहर को जोड़ने वाली नाली का निर्माण। यह योजना का उद्देश्य ग्वालियर-भिंड के किसानों को सिंचाई के लिए पानी मुहैया कराना था, ताकि नहर के टेल एंड तक पानी पहुंच सके और कृषि उत्पादन में सुधार हो सके। जिम्मेदार बोले- जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी… मैं पूरे मामले की जांच कराऊंगा, जो भी गडबड़ी मिलेगी उसके जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जाएगी।
-तुलसीराम सिलावट, जलसंसाधन मंत्री इस साल निर्माण पूरा हो जाएगा… हरसी बांध के निचले हिस्से में जहां निर्माण होना है वहां का पानी खाली नहीं हो पाया है। अभी सिंचाई के लिए पानी दिया जा रहा है। इस साल फीडर नहर का निर्माण पूरा कर लिया जाएगा।
-आरपीएस कंवर, मुख्य अभियंता, दतिया कंपनी को फायदा पहुंचाने परियोजना का अलग-अलग ट्रांसफर यह परियोजना शुरू में मड़ीखेड़ा डिवीजन में था, फिर इसे आरबीसी नरवर संभाग में ट्रांसफर किया गया और फिर इसे मड़ीखेड़ा में ट्रांसफर कर दिया गया। परियोजना का डिवीजन बदले जाने के पीछे भी एक अधिकारी व कंपनी के बीच सांठगांठ बताई गई है। परियोजना का स्कोप बदला… परियोजना में कंक्रीट नहर का प्लान बना था, लेकिन इसे बदलकर पाइप डालने में बदल दिया गया। परियोजना में जो पाइप उपयोग किए जा रहे हैं उनकी गुणवत्ता भी घटिया है यह भी एक अलग जांच का मुद्दा है।

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