भास्कर न्यूज|ब्यावर अमृतकौर अस्पताल में रात के समय इमरजेंसी में मरीज को दिखाने के बाद दवा लेने के लिए मुख्य भवन स्थित दवा केंद्र जाना पड़ता है। इस समस्या से हर महीने करीब 600 मरीजों और उनके परिजनों को गुजरना पड़ता है। जानकारी के अभाव में मरीज और परिजन अस्पताल परिसर में भटकते रहते हैं। रात के समय अस्पताल के मुख्य भवन का गेट बंद रहता है और वहां किसी भी प्रकार का सुरक्षा गार्ड तैनात नहीं होता। दूर से देखने पर ऐसा प्रतीत होता है कि पूरा भवन बंद है, जिससे मरीज भ्रमित हो जाते हैं। बुधवार रात एक मरीज अपने परिजनों के साथ दवा लेने के लिए मुख्य भवन के बाहर दो बार चक्कर लगा चुका था। गेट बंद प्रतीत होने के कारण वह दूसरे प्रवेश द्वार की तलाश करता रहा। आखिरकार रात 12:42 बजे मरीज ने मुख्य भवन स्थित दवा केंद्र से दवा प्राप्त की। अस्पताल प्रशासन ने रात में केवल इमरजेंसी वार्ड के बाहर गार्ड तैनात कर रखे हैं, जबकि मुख्य भवन पूरी तरह असुरक्षित है। ऐसी स्थिति में किसी भी अप्रिय घटना या चोरी की जिम्मेदारी तय करना मुश्किल होगा। उल्लेखनीय है कि दो माह पूर्व पुराने गायनिक भवन में सुरक्षा के अभाव में चोरी की घटना हो चुकी है।


