योगी महंत सभा ने भैरवप्राचीन नाथ मंदिर की देखरेख का जिम्मा महंत बालक नाथ को सौंपा

भास्कर न्यूज | अमृतसर दुर्ग्याणा आबादी के प्राचीन भैरवनाथ मंदिर के महंत बाबा बालक नाथ ने बताया कि यह मंदिर 600 साल पुराना है और नाथ संप्रदाय के अधीन है। महंत बालक नाथ ने कहा कि यह मंदिर भैग 12 पंथ योगी महासभा हरिद्वार के अंतर्गत है। योगी महासभा की ओर से 1986 में योगी शिवनाथ को भैरवनाथ मंदिर का महंत नियुक्त किया गया। वहीं अगस्त 1916 में जब योगी शिवनाथ अपना चोला छोड़कर ब्रह्मलीन हो गए तो उनकी समाधि होशियारपुर जिला के नवीन गांव में बनाई गई। योगी शिवनाथ के ब्रह्मलीन होने के बाद योगी महंत सभा ने महंत आजाद नाथ को इस मंदिर के देखरेख की जिम्मेदारी सौंपी। उन्होंने आरोप लगाते कहा कि कुछ नशेड़ियों की ओर से आजाद नाथ के साथ मारपीट की तो वह परेशानी में आकर यहां से चले गए। इसके बाद योगी महंत सभा की ओर से उनके गुरु यानि (बाबा बालक नाथ) को गद्दी दे दी। अब वहीं इस मंदिर का सारा कार्यभार संभाल रहे हैं। महंत बालक नाथ ने बताया कि 30 नवंबर को सेवादार सुरजीत नाथ ने अपना चोला छोड़ दिया। कुछ लोगों ने प्रशासन की मिलीभगत से उसकी समाधि मंदिर में लगावा दी जो सरासर गलत है। उन्होंने कहा कि सुरजीत नाथ की समाधि नाथ संप्रदाय की विधि विधान से नहीं लगाई। वहीं 2 दिसंबर को मंदिर में किसी तरह का कोई टकराव न हो इसके लिए उन्होंने जिला और पुलिस प्रशासन को पत्र लिखा था। जिसके बाद पुलिस प्रशासन ने मंदिर की बैरिके​ड करके सील कर दिया। वहीं एसीपी जसपाल सिंह की तरफ से उनसे भोग लगाने की आज्ञा ली। जिसमें साधु संतनाथ और एक अन्य साधु को बुलाकर भोग लगाकर क्रिया की गई। महंत जी का कहना है कि पुजारिन संतोष नाथ पिछले कई बरसों से मंदिर की सेवा निभा रही हैं। वह सुबह शाम नित नियमों और विधि विधान से पूजा पाठ करती हैं। इस मौके पर महंत बलवंत नाथ, पुजारिन संतोष नाथ समेत महंत मौजूद रहे।

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