जम्मू-कश्मीर, हिमाचल, मेघालय जैसे ठंडे प्रदेशों की फसल स्ट्रॉबेरी अब इस आदिवासी अंचल के किसानों को भी रास आने लगी है। जिले के कुराबड़ ब्लाॅक में दाे साल से इसकी खेती की जा रही है। नतीजे देखकर धीरे-धीरे नए किसान भी इससे जुड़ रहे हैं। पिछले साल 15 किसानों ने यह पहल की थी। इस बार 26 गांवाें के 82 किसान स्ट्राॅबेरी उगा रहे हैं। फसल लगभग तैयार है, जो जनवरी से मार्च के बीच बाजार में लाई जाएगी। कृषि विभाग के साथ मिलकर एरिया में नवाचार कर रहे एनजीओ अर्पण सेवा संस्थान के प्रयासों से यह सब हो पाया है। समन्वयक रत्नेश कुमार सुखवाल ने बताया कि हर किसान काे 500-500 पाैधे निशुल्क दिए थे। बुवाई 15 सितंबर से 15 अक्टूबर तक की गई। फसल 40 से 50 दिन बाद अब पकने आई है। पिछले साल किसान कम थे, इसलिए महज 30 क्विंटल उत्पादन हो पाया। इस साल 164 क्विंटल उपज मिलना तय है। किसान को 25 से 30 हजार रुपए तक का मुनाफा होगा। क्योंकि स्ट्राॅबेरी के हर फार्म में 500 तक पाैधे लगाए जाते है। इनसे करीब 2 क्विंटल फल मिलता है। होलसेल रेट 300 रु. प्रति किलो
यह हाेलसेल में करीब 300 रुपए प्रति किलाे की दर से बिकता है। यानी हर किसान को 60 हजार की आमदनी होगी। इसमें करीब 10 हजार पाैधाें रुपए खाद-दवा और खरपतवार राेकने के लिए शीट लगाने, 10 हजार रुपए मजूदरी-पैकिंग और करीब 10 हजार रुपए खेत पर नेट (जाल) लगाने और बिजली-पानी पर खर्च हाेते हैं। महज 2100 वर्गफीट जगह काफी, 30 डिग्री तक पारा भी मुफीद सुखवाल ने बताया कि स्ट्रॉबेरी की खेती शुरू करने से पहले सभी संभावनाएं-आशंकाएं तलाशीं। कृषि विभाग के विशेषज्ञों ने बताया कि 150 से 200 स्क्वायर मीटर यानी 1600 से 2200 वर्गफीट के छोटे प्लॉट में भी इसके पाैधे लगा सकते हैं। इसके लिए 20 से 30 डिग्री तापमान मुफीद रहता है। न्यूनतम 4 डिग्री तक रह जाए, तब भी नुकसान नहीं होता। ये स्थितियां उदयपुर में खेती के लिहाज से उपयुक्त लगीं। दरअसल, कृषि विभाग ने 10 साल पहले स्ट्राॅबेरी की खेती की संभावनाओं की तलाश में यहां की जलवायु, मिट्टी आदि काे परखा था। करीब 10 किसानाें काे इसकी ट्रेनिंग भी दी, लेकिन काेई प्राेजेक्ट नहीं आया। इसलिए विशेष काम नहीं हाे सका। मार्केटिंग की समस्या भी थी। नतीजतन किसानाें ने दिलचस्पी नहीं दिखाई। कृषि विभाग नया प्राेजेक्ट बनाकर खेती काे बढ़ावा देगा
जिला परिषद के कृषि विस्तार के संयुक्त निदेशक सुधीर वर्मा का कहना है कि विभाग स्ट्रॉबेरी की खेती काे बड़े स्तर पर करने के लिए याेजना बना रहा है। आदिवासी अंचल में छाेटी जाेत हाेने से इसकी आसानी से खेती की जा सकती है। 150 से 200 स्क्वायर मीटर के खेत भी काफी है। सरकार की मदद से किसानाें काे निशुल्क पाैधे देकर खेती करवाएंगे। इससे ग्रामीणाें की आय बढ़ेगी।


