रफ्तार, जोखिम और रोमांच का संगम: चौथ माता मेले में ‘मौत का कुआं’ बना सबसे बड़ा आकर्षण

चौथ माता के सात दिवसीय मेले में जहां झूले, चकरी, नाव और ब्रेक डांस जैसे मनोरंजन के साधन लोगों को लुभा रहे हैं, वहीं इस बार सबसे ज्यादा भीड़ जिस जगह उमड़ रही है, वह है-मौत का कुआं। पांच साल बाद भरतपुर से आया यह रोमांचक खेल मेले की पहचान बन चुका है। लोहे के विशाल कुएं के भीतर तेज रफ्तार मोटरसाइकिलें और कार जब दीवारों पर दौड़ती हैं, तो पल भर के लिए दर्शकों की सांसें थम जाती हैं। कुएं के भीतर तीन मोटरसाइकिल और एक कार के हैरतअंगेज करतब रफ्तार और संतुलन की ऐसी मिसाल पेश कर रहे हैं, जहां जरा-सी चूक भी बड़े हादसे में बदल सकती है। फिर भी कलाकारों का आत्मविश्वास और नियंत्रण हर करतब के साथ तालियों की गूंज बढ़ा देता है। दिन के साथ-साथ रात के शो में भी यह खेल लोगों को खींच रहा है। दर्शक चलते वाहन पर कलाकारों को इनाम थमाकर उत्साह बढ़ाते नजर आते हैं। इस शो के संचालक भरतपुर के फिरोज खान के साथ साहिल, अलीबाबा और सलमान वर्षों से इस खतरनाक कला को जीवित रखे हुए हैं। कलाकारों का कहना है कि यह हुनर उन्हें विरासत में मिला है। बिना किसी औपचारिक अभ्यास के वे हर शो में केवल दर्शकों और बनाई गई रेड लाइन पर फोकस रखते हैं। चौथ का बरवाड़ा मेले में यह मौत का कुआं न सिर्फ मनोरंजन है, बल्कि साहस, संतुलन और परंपरा का जीवंत प्रदर्शन भी बन गया है। यह करतब हमारे लिए सिर्फ खेल नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चला आ रहा हुनर है। शो के दौरान हमारा पूरा ध्यान रफ्तार और दर्शकों की सुरक्षा पर रहता है। रेड लाइन से बाहर जाना खतरे का संकेत होता है, इसलिए संतुलन सबसे अहम है। – साहिल खान, कलाकार (मौत का कुआं)

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