राष्ट्रीय जनजातीय आयोग की सदस्य एवं रांची की पूर्व मेयर आशा लकड़ा ने कहा कि जबतक सरकार के साथ बैठक न हो और जांच रिपोर्ट नहीं आ जाए, तब तक सिरमटोली रैंप का उद्घाटन न हो और न ही कोई निर्माण कार्य हो। ये बातें उन्होंने मंगलवार को आर्यभट्ट सभागार में आदिवासी संगठनों के साथ आयोजित बैठक के दौरान कहीं। वे 13 मई को सरकार के साथ तय बैठक को स्थगित करने से नाराज दिखीं। कहा कि जब टीम दिल्ली से बैठक करने के लिए रांची निकल चुकी थी, तब विभागीय सचिव कृपानंद झा का पत्र आता है कि अपरिहार्य कारणों से बैठक स्थगित की जाती है। यह ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि दो से चार दिनों के अंदर सरकार के साथ बैठक की जाएगी। इसके बाद कोई अंतिम निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने आदिवासी संगठनों को भी सलाह दी कि जब तक इसका अंतिम निर्णय न हो जाए, तब तक आप कानून हाथ में ना लें। आशा लकड़ा ने कहा कि यह बात केवल रांची के सिरमटोली की ही नहीं है। पूरे राज्य में आदिवासी धार्मिक स्थलों का अतिक्रमण हो रहा है। वे रांची की बेटी हैं। रांची में जन्मी एवं पली-बढ़ी हैं। एक-एक चीज को अच्छी तरह से जानती एवं समझती हैं। जब सिरमटोली फ्लाईओवर रैंप मामले को लेकर आवेदन आयोग तक पहुंचा, तब आयोग ने अपनी कार्यवाही शुरू की। सरकार को नोटिस दिया। इसके बाद बैठक तय की गई। मगर बैठक टाल दी गई, इसलिए दो से चार दिनों में यह बैठक होगी। सरकार को पत्र लिख दिया गया है। बैठक में एक-एक चीज को रखा जाएगा। अगर वाकई में रैंप निर्माण में सरना स्थल एवं आदिवासी समाज की भावना आहत हुई है या कुछ गलत हुआ है, तो उसकी अनदेखी नहीं की जाएगी। बैठक के बाद आयोग की टीम पहुंची सिरमटोली, किया निरीक्षण आदिवासी संगठनों के साथ बैठक के बाद आयोग की टीम सिरमटोली पहुंची। जहां पर एक-एक चीज को बारीकी से देखा व समझा गया। अब इसे सरकार के साथ बैठक में रखा जाएगा। मालूम हो कि केंद्रीय एवं चडरी सरना समिति के अध्यक्ष बबलू मुंडा के नेतृत्व में लोग इस मामले को लेकर दिल्ली गए थे। जहां पर ये लोग एसटी आयोग की सदस्य आशा लकड़ा को पिछले चार अप्रैल को एक मांग पत्र सौंपा था। आयोग ने इसे संज्ञान में लेते हुए कार्यवाही सुनिश्चित की। सरकार ने आयोग के साथ 13 मई को बैठक तय की थी, पर टाल दिया गया।


