सड़क परिवहन मंत्रालय ने स्लीपर बसों के लिए नई गाइडलाइन जारी की है। इसमें यात्रियों की सुरक्षा पर ध्यान दिया गया है। लेकिन रांची से चलने वाली स्लीपर बसे सुरक्षा में फेल हैं। गाइडलाइन जारी होने के बाद दैनिक भास्कर ने खादगढ़ा बस स्टैंड में 20 स्लीपर बसों की पड़ताल की। पता चला कि इनमें से 14 बसों में चार इमरजेंसी गेट नहीं थे। यानी 70 प्रतिशत बसें ऐसी चल रही हैं। अधिकतर बसों में ड्राइवर और यात्रियों के प्रवेश के लिए आगे मुख्य दरवारे तो थे, लेकिन पीछे इमरजेंसी गेट नहीं मिला। अधिकतर बसों में रूफ हैच भी नहीं मिला। फायर सेफ्टी की स्थिति भी चिंताजनक थी। 20 में से सिर्फ दो बसों में फायर एक्सटिंग्विशर (अग्निशामक यंत्र) मिले, वे भी निर्धारित 10 किलो की क्षमता से छोटे थे। इनमें से पांच बसों की चेसिस भी बढ़ाई गई थी, जो नियमों के खिलाफ है। स्लीपर सीटों पर पर्दे लगे थे। छत पर भी सामान ढोने के लिए कैरियर थे। बस संचालक बोले-सुधार कर रहे हैं बस संचालक और चैंबर के एग्जीक्यूटिव मेंबर अनीश बुघिया ने कहा कि सरकार ने उन्हें एक महीने का समय दिया गया है। ज्यादातर बस संचालक कमियों को दूर करने में लगे हैं। इमरजेंसी गेट, फायर सेफ्टी और अन्य मानकों को दुरुस्त किया जा रहा है। हमें उम्मीद है कि एक महीने के भीतर सभी बसें नई गाइडलाइन के अनुसार चलने लगेंगी। पंजीकरण से पहले सुरक्षा जांच जरूरी : बसों के पंजीकरण और फिटनेस के समय आरटीओ यह सुनिश्चित करेगा कि बस का निर्माण तय मानकों के अनुसार हुआ हो और बस बॉडी बिल्डर मान्यता प्राप्त हो। चार एक्जिट जरूरी: स्लीपर बसों में कम से कम चार एक्जिट अनिवार्य किए गए हैं,। इनमें पीछे का दरवाजा, साइड या छत पर निकासी शामिल हो सकती है। फायर सेफ्टी : हर स्लीपर बस में 10 किलो या उससे अधिक क्षमता के फायर क्सटिंग्विशर जरूरी। चेसिस बढ़ाने पर रोक : स्लीपर बर्थ के स्लाइडर हटाना, चेसिस बढ़ाकर बनाई गई बसें को परिचालन से बाहर हटाना। गाइडलाइन का पालन कराएंगे: डीटीओ जिला परिवहन पदाधिकारी अखिलेश कुमार ने कहा कि बस संचालकों को एक माह का समय दिया गया है। हमारी टीम लगातार चेकिंग भी कर रही है। जांच में पाया गया है कि आधी से ज्यादा बसों में गाइडलाइन के अनुसार इमरजेंसी गेट नहीं हैं। फायर एक्सटिंग्विशर हैं भी तो वह मानकों के अनुरूप नहीं है। इसका पालन कराया जा रहा है। समय-सीमा के बाद कार्रवाई तय है।


