रांची में ‘ट्री एम्बुलेंस’ की नई पहल:बीमार पेड़ों को दे रही नई जिंदगी, 5 साल में 3 हजार पेड़ों का उपचार

राजधानी रांची के घटते शहरी ग्रीन कवर को बचाने के लिए आरकेडीएफ विवि ने सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (सीसीएल) के सहयोग से एक बेहद अनोखी पहल शुरू की है। ‘ट्री एम्बुलेंस’ नाम की यह परियोजना अब शहर की हरियाली को नया जीवन देने का बड़ा माध्यम बन चुकी है। पिछले 5 वर्षों में इस मोबाइल क्लिनिक ने रांची और आसपास के इलाकों में 3000 से अधिक बीमार पेड़ों का सफलतापूर्वक इलाज किया है। विशेषज्ञों का कहना है कि शहरीकरण की तेज रफ्तार में जिस तरह पेड़ संक्रमित और कमजोर होते जा रहे हैं। ऐसे समय पर यह पहल पर्यावरण संरक्षण का मजबूत मॉडल बनकर उभरी है। यह उदाहरण भी है कि कॉर्पोरेट और शैक्षणिक संस्थानों का सहयोग मिलकर शहरों के हरित भविष्य को कैसे सुरक्षित कर सकता है। मोबाइल क्लिनिक की तरह काम करती है ट्री एम्बुलेंस ट्री एम्बुलेंस पूरी तरह से पेड़ों के इलाज के लिए तैयार एक मोबाइल यूनिट है। इसमें मिट्टी की गुणवत्ता बढ़ाने वाले उपकरण, जैविक कीटनाशक, विशेष उर्वरक और बीमारी पहचानने वाली तकनीकी सामग्री मौजूद रहती है। सूचना मिलते ही 2 या 3 विशेषज्ञों की टीम मौके पर पहुंचकर पेड़ों की जांच करती है और उसी समय उपचार शुरू कर देती है। कई बीमारियों की पहचान बिना देरी किए हो जाती है, जिससे पेड़ जल्द ठीक हो जाते हैं। इस परियोजना का विचार आरकेडीएफ विवि के रजिस्ट्रार डॉ. अमित कुमार पांडेय को 2020 में आया था। 22 अगस्त, 2020 को विवि के एमडी सिद्धार्थ कपूर ने इसकी औपचारिक शुरुआत की। शुरुआत से ही सीसीएल ने वित्तीय और तकनीकी सहयोग देकर इस परियोजना को मजबूत आधार दिया। तीन चरणों में पेड़ों को दिया जाता है नया जीवन उपचार: सबसे पहले पेड़ों की बीमारी की जांच होती है। जरूरत पड़ने पर जैविक कीटनाशकों और उर्वरकों का इंजेक्शन दिया जाता है, जिससे संक्रमण तेजी से खत्म हो सके। मिट्टी की गुणवत्ता बढ़ाना: कई पेड़ों का कमजोर होना मिट्टी के खराब होने की वजह से भी होता है। टीम ऐसे मामलों में मृदा उपचार कर उसकी गुणवत्ता बढ़ाती है। मरम्मत: संक्रमित या मृत शाखाओं की छंटाई कर पेड़ को राहत दी जाती है। इससे उसका विकास तेज होता है और वह स्वस्थ रूप से बढ़ने लगता है। इन प्रक्रियाओं ने हजारों पेड़ों को नया जीवन दिया है। जल्द पूरे झारखंड को मिलेगी यह सेवा परियोजना की सफलता को देखते हुए अब आरकेडीएफ विवि इसे रांची से बाहर भी विस्तार देने की तैयारी में है। सहायक कुलसचिव पंकज चटर्जी के मुताबिक, आने वाले समय में प्रतिवर्ष इलाज किए जाने वाले पेड़ों की संख्या बढ़ाई जाएगी। इसके साथ ही स्थानीय लोगों को प्रशिक्षण देकर सामुदायिक भागीदारी को मजबूत किया जाएगा। बड़े इलाकों में पेड़ों के स्वास्थ्य की निगरानी के लिए ड्रोन और डेटा एनालिटिक्स जैसी आधुनिक तकनीक को भी जोड़ा जाएगा।

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