झारखंड के विश्वविद्यालयों में लोकपाल की नियुक्ति तो कर दी गई, लेकिन यह सिर्फ कागजी औपचारिकता बनकर रह गई। यह तस्वीर है रांची विश्वविद्यालय की। यहां लोकपाल कार्यालय का रास्ता ही बंद है, क्योंकि जिस गलियारे से उस कार्यालय का रास्ता है, वहां उत्तर पुस्तिकाओं का अंबार खड़ा है। करीब डेढ़ साल पहले डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय के पूर्व कार्यवाहक कुलपति प्रो. डॉ. यूसी मेहता को रांची विश्वविद्यालय का लोकपाल नियुक्त किया गया है। वे कहते हैं, “मैं जब भी विश्वविद्यालय जाता हूं तो अपने कार्यालय तक जाना संभव नहीं होता, क्योंकि उत्तर पुस्तिकाओं की वजह से रास्ता ही बंद है। मजबूरी में रजिस्ट्रार, वित्त अधिकारी या अन्य अधिकारियों के कमरे में बैठकर लौट जाता हूं।” अन्य विश्वविद्यालयों में भी यही हाल डीएसपीएमयू: कार्यालय शानदार पर अक्सर बंद डीएसपीएमयू में लोकपाल का शानदार कार्यालय है, लेकिन यह अक्सर बंद ही रहता है। कार्यालय में मेज-कुर्सी पर धूल की मोटी परत जमी है। लोकपाल डॉ. अनिल कुमार कहते हैं, “नियमित रूप से सफाई का निर्देश दिया है, लेकिन ऐसा होता नहीं। एक सप्ताह पहले कार्यालय गया था। वहां बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव है।” गलियारे में खड़ी कर दी उत्तर-पुस्तिकाओं की दीवार कार्यालय जाने का रास्ता केयू-महिला विश्वविद्यालय जमशेदपुर में नहीं दिया योगदान: प्रो. टीआर थापक को 28 जून 2024 को लोकपाल नियुक्त किया गया, लेकिन इन्होंने अब तक योगदान ही नहीं दिया। विभावि हजारीबाग में कार्यालय ही नहीं: विनोबा भावे विश्वविद्यालय हजारीबाग में डॉ. सुनील कुमार को लोकपाल नियुक्त किया गया, लेकिन यहां कार्यालय ही नहीं है। इससे शिकायत निवारण की प्रक्रिया शुरू ही नहीं हो पाई है।


