राजकीय अधिवक्ता नियुक्त करना सरकार का विशेषाधिकार:हाई कोर्ट ने नियुक्ति नहीं करने पर स्वप्रेरणा से दर्ज मामले को किया निस्तारित

राजस्थान हाईकोर्ट में राजकीय अधिवक्ता की नियुक्ति को लेकर एकलपीठ द्वारा स्वप्रेरणा से दर्ज याचिका को खंडपीठ ने निस्तारित कर दिया। आज मुख्य न्यायाधीश एमएम श्रीवास्तव की खंडपीठ ने याचिका को निस्तारित करते हुए कहा कि राजकीय अधिवक्ता नियुक्त करना सरकार का विशेषाधिकार हैं। दरअसल, 16 मार्च को एकलपीठ ने हाईकोर्ट की पूर्णपीठ की सहमति के बाद भी अधिवक्ता ब्रह्मानंद सांदू की राजकीय अधिवक्ता के पद पर नियुक्त को लेकर निर्णय नहीं लेने पर इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए स्वप्रेरणा से याचिका दायर की थी। वहीं स्पष्टीकरण देने के लिए प्रमुख शासन सचिव विधि को तलब किया था। यह जनहित से जुड़ा मामला नहीं
अदालत ने आदेश में कहा कि यह जनहित का मामला नहीं है और ऐसे में इस पर स्वप्रेरणा से प्रसंज्ञान भी नहीं लिया जा सकता। इसके अलावा अधिवक्ता नियुक्ति को लेकर राज्य सरकार को विशेषाधिकार प्राप्त है। अदालत ने अधिवक्ता सांदू को छूट दी है कि वे चाहे तो इस संबंध में अलग से सर्विस रिट पेश कर सकते हैं। अधिवक्ता सांदू ने कहा कि मार्च 2024 में उनका पुलिस वेरिफिकेशन हुआ था और तब उन्हें पता चला था कि राज्य सरकार ने उनका नाम जयपुर पीठ में जीए-एएजी पद के लिए तय किया है। वहीं हाईकोर्ट प्रशासन की ओर से भी माना कि उनके नाम की सहमति दी गई थी। इसके अलावा राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि अधिवक्ता नियुक्ति को लेकर राज्य सरकार के पास अधिकार सुरक्षित हैं। इस पर अदालत ने प्रकरण को निस्तारित कर दिया।

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