राजगढ़ जिले में नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में न्यायालय ने त्वरित फैसला सुनाया है। 62 वर्षीय आरोपी गोरधन जाटव को आजीवन कारावास और 25,000 रुपए के अर्थदंड की सजा सुनाई गई है। यह फैसला भारतीय न्याय संहिता और पॉक्सो अधिनियम के तहत 18 दिन की रिकॉर्ड सुनवाई के बाद आया है। दरअसल, यह घटना मार्च 2025 में थाना करनवास क्षेत्र में हुई थी। 15 वर्षीय पीड़िता जंगल में बकरियां चराने गई थी, तभी आरोपी गोरधन जाटव ने उसे पकड़कर दुष्कर्म किया। आरोपी ने पीड़िता को जान से मारने की धमकी भी दी थी। अगस्त में पुलिस से की थी शिकायत
पीड़िता ने अपनी बुआ को घटना की जानकारी दी, जिसके बाद 18 अगस्त 2025 को थाना करनवास में रिपोर्ट दर्ज कराई गई। पुलिस ने मुखबिरों की मदद से आरोपी गोरधन जाटव को ग्राम देवलखेड़ा के जंगल से गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया। इस मामले में सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी डॉली गुप्ता ने अभियोजन पक्ष की पैरवी की। थाना करनवास के उप निरीक्षक कर्मवीर सिंह ने केस की जांच की। कोर्ट ने कहा- आरोपी को माफ नहीं किया जा सकता
कोर्ट ने इस मामले में दिन-प्रतिदिन सुनवाई करते हुए केवल 18 दिन में फैसला सुनाया। पीड़िता की स्वास्थ्य सुरक्षा और गर्भपात की प्रक्रिया के लिए उच्च न्यायालय की संवेदनशीलता और गांधी मेडिकल कॉलेज भोपाल की चिकित्सकीय टीम का सहयोग लिया गया। जिला प्रशासन ने भी त्वरित न्याय सुनिश्चित करने के लिए विशेष दिशा-निर्देश जारी किए थे। न्यायालय ने अपने फैसले में कहा कि 16 वर्ष से कम आयु की बालिकाओं को देवी स्वरूप माना जाता है। इस घटना में आरोपी को माफ नहीं किया जा सकता। इस त्वरित फैसले से जिले में नाबालिगों के खिलाफ अपराधों में न्याय की तेज व्यवस्था की एक मिसाल कायम हुई है।


