राजनीतिक खींचतान में फंसा ग्वालियर व्यापार मेला:पांच दशक में पहली बार ऐसा, नहीं हुआ मेले का औपचारिक उद्घाटन, तारीख भी अब तक तय नहीं

व्यापार मेले के विकास और विस्तार के दावों के बीच राजनीतिक खींचतान के चलते पांच दशक में पहली बार ऐसा हो रहा है कि मेले की लगभग आधी अवधि बीतने के बाद भी न तो मेले का उद्घाटन हो पाया है और न ही अब तक उद्घाटन की कोई तिथि तय हुई है। मेले के मुख्य आकर्षण ऑटोमोबाइल सेक्टर को मिलने वाली रोड टैक्स की छूट की घोषणा भी मेला लगने के 20 दिन बाद हुई। जिम्मेदारों की उदासीनता के चलते मेला दिनोंदिन अपना मूल स्वरूप खोते दिखाई दे रहा है। मेले के दुकानदारों का कहना है कि मेले की शुरुआत से लेकर समापन तक प्रदेश के चार-पांच मंत्री आते थे। इस बार मेले में राजनीतिक उदासीनता का माहौल है। प्राधिकरण के अधिकारी भी मेले के स्वरूप की चिंता छोड़कर यहां सिर्फ अपनी कमाई पर ध्यान दे रहे हैं। वहीं मेले के उद्घाटन के संबंध में जब ग्वालियर संभाग के आयुक्त मनोज खत्री का मोबाइल लगाया तो उन्होंने उठाया नहीं। वहीं मैसेज और वाट्सएप का कोई जवाब नहीं दिया। मेले में दूसरे दिन 573 कार तो 141 दो पहिया बिके मेले में गुरुवार को मेले में 573 कार तो 141 दो पहिया वाहन बिके। जिनका सत्यापन आरटीओ कार्यालय में हुआ है। मेले में अभी ऑटोमोबाइल डीलर्स शोरूम तैयार करवा रहे हैं। शोरूम तैयार होने के बाद ऐसे डीलर्स को ट्रेड लाइसेंस जारी किए जाएंगे। पशु मेला… मेले की शुरुआत एक सदी पहले सागरताल पर पशु मेले के रूप में हुई थी। इसके बाद व्यापार मेले से लेकर ट्रेड फेयर तक का सफर तय किया, लेकिन पशु मेला लगाने की परंपरा को 2 साल से बंद कर दिया गया है।
दंगल… मेले का आकर्षण दंगल भी रहता था। इसके स्वरूप को भी कमजोर किया गया। मेले में अभी तक दंगल को लेकर कोई सूचना जारी नहीं की है। 45 साल से लगा रहा दुकान, ऐसा पहली बार
^मैं 45 साल से मेले में कारोबार कर रहा हूं, यह पहला मौका है जब न तो मेले का औपचारिक उद्घाटन हुआ है और न ही तारीख तय है। -महेंद्र भदकारिया, मेला व्यवसायी जल्द तय करेंगे मेले का उद्घाटन की तारीख
^रोड टैक्स में छूट जारी होने के बाद ही मेला रंग पर आता है। इस कारण अभी तक मेले का उद्घाटन नहीं हुआ। जल्द ही इसकी तारीख तय करेंगे। -तुलसीराम सिलावट, प्रभारी मंत्री

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