राजपूत समाज ने मृत्यु भोज पर लगाया प्रतिबंध:खुड़ी में बैठक कर कई अन्य कुरीतियों को भी समाप्त किया

डीडवाना के निकटवर्ती ग्राम खुड़ी में रविवार को राजपूत समाज की एक महत्वपूर्ण बैठक माताजी मंदिर परिसर में आयोजित की गई। इस बैठक में समाज में प्रचलित मृत्यु भोज सहित कई कुरीतियों और अनावश्यक परंपराओं को समाप्त करने का सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया। इन निर्णयों को समाजहित में एक ऐतिहासिक कदम बताया गया है। बैठक में मृत्यु भोज को पूर्णतः बंद करने का अहम फैसला लिया गया। इसके तहत, तीजा का मृत्यु भोज, नवमी पर काग़ज़ (कागोल) बांटने की परंपरा, ग्यारहवें दिन सामूहिक भोजन के न्योते और बारहवें दिन होने वाले मृत्यु भोज पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। निर्णय के अनुसार, मृत्यु उपरांत केवल परिवार के सदस्य, नजदीकी रिश्तेदार और पांच ब्राह्मण ही शामिल हो सकेंगे। किसी भी प्रकार का आमंत्रण पत्र (न्योता) नहीं दिया जाएगा। मृत्यु के बाद की ‘पहरानी’ की परंपरा भी समाप्त कर दी गई है, जिसमें केवल बेटी-जमाई को प्रतीक स्वरूप 100 रुपए दिए जाएंगे। छह महीने बाद होने वाले शोक आयोजन को भी बंद करने का निर्णय लिया गया है। उपस्थित समाजजनों ने इन निर्णयों को समाज को आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने सभी सदस्यों से इन नए नियमों का पालन करने का आह्वान किया। बैठक में समाज में शिक्षा को बढ़ावा देने, बच्चों को शिक्षित कर समाज को आगे बढ़ाने और जरूरतमंद लोगों की सहायता करने पर भी विशेष जोर दिया गया। इस अवसर पर बलवीर सिंह मास्टर, शिंभू सिंह, संपत सिंह, हड़मान सिंह, कल्याण सिंह, नरपत सिंह, दिलीप सिंह, तेज सिंह, मूल सिंह, कान सिंह, बलबीर सिंह पीटीआई, मोहब्बत सिंह, इंद्र सिंह, हरि सिंह, नरेंद्र सिंह, महेंद्र सिंह, गिरवर सिंह, विजय सिंह, जोरावर सिंह, नरपत सिंह, नरपत सिंह पावा और विक्रम सिंह सहित बड़ी संख्या में समाजबंधु मौजूद रहे।

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