एजुकेशन रिपोर्टर| रांची उच्च शिक्षण संस्थानों में एडमिशन कैंसिल कराने के बाद शुल्क वापसी का प्रावधान है। लेकिन राज्य के कुछ विवि में यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (यूजीसी) के फीस रिफंड पॉलिसी की अनदेखी करने का मामला प्रकाश में आया है। इससे संबंधित शिकायत राजभवन को भी मिली है। इसके बाद राजभवन ने राज्य के सभी सरकारी और निजी विश्वविद्यालयों को फीस रिफंड पॉलिसी के प्रावधानों का पालन करने का निर्देश दिया है। राज्यपाल सह कुलाधिपति संतोष कुमार गंगवार के अपर मुख्य सचिव नितिन मदन कुलकर्णी ने राज्य के सभी विवि के कुलपतियों को पत्र लिखकर यूजीसी गाइड लाइन का पालन करने का निर्देश दिया है। बताते चलें कि यूजीसी फीस रिफंड पॉलिसी के अनुसार, अगर एडमिशन लेने के बाद छात्र किसी भी कारण से अपनी सीट छोड़ता है तो कॉलेज प्रबंधन को उसकी फीस वापस करनी पड़ेगी। इसके लिए समय सीमा निर्धारित है। छात्र अगर 30 सितंबर तक अपनी सीट छोड़ते हैं तो यूनिवर्सिटी या कॉलेज प्रबंधन उनकी पूरा फीस रिफंड करेंगे। वहीं अगर 31 अक्टूबर तक सीट छोड़ते हैं, तो एक हजार प्रोसेसिंग फीस काटकर बाकी की फीस वापस करनी होगी। यूजीसी का कहना है जिन संस्थानों में एडमिशन प्रक्रिया 31 अक्टूबर के बाद भी जारी रहती है, तो एडमिशन के अंतिम तिथि से 15 दिन पहले आवेदन करने वाले छात्रों की 100 प्रतिशत फीस वापस करनी होगी। अनदेखी पर कार्रवाई का प्रावधान : यूजीसी की रिफंड पॉलिसी की अनदेखी किए जाने पर संबंधित विश्वविद्यालय, कॉलेज और उच्च शिक्षण संस्थानों पर कार्रवाई हो सकती है। अगर कोई यूनिवर्सिटी या कॉलेज रिफंड पॉलिसी के नियमों का उल्लंघन करते हैं तो उन पर जुर्माना से लेकर मान्यता रद्द करने तक का प्रावधान है।


