राजस्थान में मेडिकल टीचर्स की डीएसीपी रूकी:डॉक्टर्स का आरोप, पहले कभी भी डीएसीपी में 2 माह से ज्यादा की देरी नहीं हुई; 300 से ज्यादा फेकल्टी मेम्बर्स प्रभावित

मेडिकल कॉलेजों में फेकल्टी के पदों पर कार्यरत करीब 300 से ज्यादा टीचर्स के प्रमोशन में देरी से मेडिकल कॉलेज शिक्षक संघों ने नाराजगी जताई है। संघ की ओर से इसके लिए दो-तीन बार मेडिकल एज्युकेशन सचिव को पत्र भी दिया गया, लेकिन अब तक शिक्षकों की डीएसीपी (डायनेमिक एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन) नहीं की गई। संघ से जुड़े डॉक्टरों ने बताया- करीब 300 डॉक्टर्स है, जिनकी पदोन्नति अप्रैल 2024 में होनी थी, लेकिन अब तक विभाग ने इनकी पदोन्नति नहीं की। डॉक्टर्स ने बताया, ये पहली बार है, जबकि डीपीसी 3 माह से ज्यादा समय निकलने के बाद भी नहीं हुई। उन्होंने बताया कि इस कारण न केवल डॉक्टर्स को वित्तीय हानि हो रही है, बल्कि कार्य भी प्रभावित हो रहा है। यूनिट्स का गठन रूका, पीजी सीट बढ़ाने में भी समस्या डॉक्टरों ने बताया- सरकार के इस निर्णय का सबसे ज्यादा असर मेडिकल कॉलेजों से अटैच हॉस्पिटल में आ रहा है। हॉस्पिटलों में अलग-अलग डिपार्टमेंटों की चल रही यूनिट की संख्या भी इस कारण बढ़ने से रूक गई है। उदाहरण के तौर पर जयपुर के जेके लोन हॉस्पिटल में ही पीडियाट्रिक मेडिसिन की यूनिट बढ़नी है, लेकिन फेकल्टी पूरी नहीं होने के कारण सरकार बढ़ा नहीं रही है। इसके अलावा इस कार्य की देरी से मेडिकल कॉलेजाें में एनएमसी के नियमाें के तहत पीजी की सीट बढ़ाने में भी समस्या आ रही है। जल्द डीएसीपी नहीं तो करेंगे कार्य बहिष्कार मेडिकल कॉलेजों के शिक्षकों की डीएसीपी पिछले साल अप्रैल से लंबित है। पदोन्नति के लिए असिस्टेंट प्रोफेसर से एसोसिएट प्रोफेसर बनने में 6 वर्ष और एसोसिएट प्रोफेसर से प्रोफेसर बनने में 4 वर्ष लगते हैं। डॉक्टरों का कहना है कि अगर जल्द ही सरकार ने डीएसीपी नहीं करवाई तो मजबूरन फेकल्टी मेम्बर्स (डॉक्टर्स) को कार्य बहिष्कार करना पड़ेगा।

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