18 जनवरी 2025 की रात। घड़ी में करीब 10 बजे होंगे। हम ऐसी जगह पर थे जिसे राजस्थान के सबसे सर्द इलाकों में से एक माना जाता है। सीकर जिले का फतेहपुर शेखावाटी। वही फतेहपुर शेखावाटी जहां 20 दिसंबर 2023 को सर्दी ने रिकॉर्ड तोड़ा था। पारा माइनस 5.2 डिग्री चला गया था। महीने भर पहले भी 15 दिसंबर की रात को पारा माइनस -2 डिग्री सेल्सियस था। यूं समझिए कि यहां सर्दियों में पारा माइनस में जाना आम बात है। यहां की सर्दी का रिकॉर्ड रोज अखबार की सुर्खियों में आता है। हेडलाइंस बनती हैं… ऐसी सर्दी में एक्सपर्ट भी मॉर्निंग वॉक टालने की सलाह देते हैं। लेकिन, यहां के किसान कभी रात तो कभी सुबह 4 बजे उठकर खेतों में जाते हैं। पाइपों में जमी पानी की बर्फ पिघलाते हैं। फिर फसलों को पानी देते हैं। भास्कर टीम ने उसी हाड़ कंपाने वाली सर्दी में किसानों के साथ रात में रुक कर जाना और समझा कि कैसे बर्फीली हवा को वे मात देते हैं? पढ़िए- पूरी रिपोर्ट …. फतेहपुर से निकलने वाले दिल्ली-बीकानेर हाईवे पर दो जांटी बालाजी का बड़ा मंदिर है। मंदिर के गेट के पास अलाव जल रहा था तो हम सीधे वहीं पहुंच गए। यहां मंदिर के चौकीदार बैठे थे। हमने उन्हें अपना परिचय और फतेहपुर आने के मकसद के बारे में बताया तो उन्होंने हमें बैठाया और पास में ही रहने वाले किसान हरलाल जाट की जानकारी दी। चौकीदार ने हमें बताया कि हरलाल जाट ने यहां अपने खेत में गेहूं की बुआई की है और खेत में चार गाय व दो भैंस पाली हुई हैं। चाहे सर्दी तेज हो या कम और पानी बर्फ बने या ओले पड़े हों, रोजाना सुबह 3-4 बजे यहां खेत में आता है। बारी आने पर गेहूं में पानी सप्लाई देता है, पशुओं का दूध निकालता है और अपने बाकी काम करता है। हमने तय किया कि अब सुबह 3 बजे तक हम यहीं हरलाल जाट के खेत के पास बैठकर उनका इंतजार करेंगे। सर्द हवा से बचने के लिए हमने अगले 5 घंटे चौकीदार के पास बैठकर अलाव तापकर गुजारे। कार ड्राइवर राकेश ने कार में ही नींद काटना उचित समझा। सुबह करीब 2:30 बजे होंगे। हरलाल जाट का खेत ज्यादा दूर नहीं था, तो हम वहां के लिए पैदल ही निकल पड़े। चारों तरफ घुप अंधेरा था। थोड़ा आगे एक छप्पर पोश में बल्ब जलता हुआ दिखाई दिया। हम वहां पहुंचे। अंदर गाय-भैंस बंधी हुई थीं। पास में पड़ी खाट पर एक शख्स पतली सी कंबल ओढ़े सो रहा था। शायद उसने हमारे आने की आहट सुन ली थी। वो जाग गया और खाट से उठकर पूछा- कौन है भाई? हमने अपना परिचय दिया और वहां आने का मकसद बताया। पंकज नाम के युवक ने बताया कि वो हरलाल का भतीजा है। पंकज ने हमें बताया कि उसके ताऊ हरलाल अब खेत में आने ही वाले हैं। पंकज ने बताया कि ताऊ हरलाल के आने से पहले वो खेत में पानी देने की तैयारी करते हैं। खेत में पानी की सप्लाई करने वाली सभी पाइपलाइनों को एक जगह करते हैं। वहीं उनकी मां और दो बहनें मिलकर गाय-भैंसों के लिए बांटा (पशु आहार) बनाती हैं। उन्हें पिलाने के लिए ठंडे पानी को गर्म करती हैं। हमें ये सब बताने के बाद पंकज अपने काम में लग गया था। (सुबह के करीब 3:30 बजे होंगे, हमने बैठकर किसान परिवार की एक्टिविटी को नोटिस किया) पंकज ने सबसे पहले माइनिंग वर्कर्स द्वारा पहने जाने वाले मोटे रबड़ से बने जूते अपने पैरों में पहने। कुछ सूखी लकड़ियों को उठाया और इन्हें चूल्हे में देकर जलाया। इसके बाद करीब 10 मिनट तक वो यहां चूल्हे के आगे हाथ सेंकता रहा। हमने थर्मल इनर के साथ दो लेयर मोटे कपड़े पहने थे। ऊपर एक मोटा स्वेटर भी था, बावजूद इसके खेत में ठंड से धूजणी (कंपकपी) छूट रही थी। बचाव के लिए पंकज के पास ही बैठे और अपने हाथ सेंकते रहे। थोड़ी देर में ही पंकज की 2 बहनें और मां एक थर्मस में चाय लेकर आईं। चाय पिलाने के बाद वे अपने काम में लग गईं। इधर, अब तक पंकज भी वहां से उठकर सीधे गेहूं की क्यारियों की तरफ बढ़ा। हम पंकज के पीछे-पीछे थे। पंकज किसी एक्सपर्ट इंजीनियर की तरह बड़ी तेजी से खेत में पड़े पाइपों और फव्वारों को एक के बाद एक चेक करता जा रहा था। एक कतार बनाने के लिए उन्हें एक सीधी लाइन में अरेंज कर रहा था ताकि ट्यूबवेल से उन्हें जोड़ा जा सके। सभी फव्वारे का मुंह उधर कर रहा था जहां अब फसलों को पानी पिलाने की जरूरत थी। सुबह 4 बजे : खेत में पहुंचे हरलाल जाट इधर, उसकी दोनों बहनें और मां बाल्टियों के जरिए चूल्हे पर रखे बड़े पतीले में पानी गर्म करने के लिए रख चुकी थीं। अब तक सुबह के चार बज गए थे। तभी बाइक पर बैठकर एक और शख्स वहां पहुंचा। हमें पंकज ने बताया कि यही उसके ताऊ किसान हरलाल जाट हैं। उनकी बाइक पर दोनों तरफ दूध के बड़े-बड़े खाली केन लटक रहे थे। परिचय होने के बाद हरलाल जाट बोले- किसान की जिंदगी तो कर्म वाली जिंदगी है। बिना वक्त गंवाए बाइक से उतरकर हरलाल सीधे खेत में दाखिल हुए, जहां गेहूं की क्यारियों को पानी देना था। एक के बाद एक सभी सीधे पड़े पाइपों को जोड़ने के बाद उन्होंने भतीजे पंकज को आवाज लगाई- पानी की मोटर स्टार्ट कर दो। अब पाइपों में पानी स्टार्ट हो गया था और खेतों में से सभी फव्वारे पानी की बौछारे फेंकने लग गए थे। हम इन बौछारों से बचते-बचते चल रहे थे। तभी कुछ बौछारें हमें लगी। यकीन मानिए, एक बार तो ऐसा लगा कि धड़कन ही रुक गई हो। दूसरी तरफ जहां-जहां पाइपों से पानी लीक हो रहा था, किसान हरलाल अपने खुले हाथों से उन्हें पकड़ कर टाइट करते जा रहे थे। जो फव्वारा कम पानी फेंक रहा था, उन्हें भीगते-बचाते हुए ठीक करते जा रहे थे। मानो ठंड का उन पर कोई असर नहीं हो। उन्हें पानी में भीगता देख हमारे शरीर में कंपकंपी महसूस हो रही थी। ये सब अगले आधे घंटे तक चलता गया। सब कुछ ओके होने के बाद हरलाल हमारे पास बात करने के लिए आए। हरलाल ने बताया कि वे रोजाना सुबह 4 बजे खेत में पहुंच जाते हैं। महीने में आधे दिन तो रात में भी आना पड़ता है। उन्होंने बताया कि यहां 16 बीघा में गेहूं की बुआई की है। दिन में लाइट नहीं रहती है, लेकिन धूप निकलती है तो सोलर वाले सिस्टम से मोटर चलाते हैं और फसलों को पानी पिलाते हैं। रात में कुछ देर और सुबह जल्दी लाइट आती है तो उस समय बिजली से मोटर चलाकर खेतों में सिंचाई करनी पड़ती है। हरलाल ने बताया कि फतेहपुर राजस्थान के सबसे सर्द इलाकों में से एक है। सर्दी भी ऐसी पड़ती है कि फव्वारों में पानी में जम जाता है। फिर भी हमें तो अपना काम करना ही है। उल्टा ये सब करने से हम स्वस्थ रहते हैं। इतनी उम्र हो गई, कभी भी ठंड हमें काम करने से रोक नहीं पाई। यही तो हमारा कर्म है। हरलाल ने बताया कि खेतों में पानी देने के बाद वे दूध सप्लाई का काम भी करते हैं। सर्दी का आलम ऐसा है कि वो सुबह 6-7 बजे के करीब जब फतेहपुर में लोगों के घर दूध सप्लाई देने जाते हैं तो 80 फीसदी से ज्यादा लोग सो रहे होते हैं। उन्हें दूध घर के बाहर रखे बर्तन में खाली करके आना पड़ता है। सुबह 5 बजे : शहर सोता है, पशुपालक करते हैं दूध सप्लाई इसके बाद एक बार फिर हरलाल खेतों से निकलकर पशुओं के बाड़े में पहुंच गए। यहां उनके छोटे भाई की पत्नी पहले से हाथों में रस्सियां और बाल्टी लेकर खड़ी थी। हरलाल ने पहले सभी पशुओं को पशु आहार खिलाया। इसके बाद एक के बाद एक सभी पशुओं के पैरों में रस्सी बांध उनका दूध निकालने लग गए। आधे घंटे में ही वो चार गाय और दो भैंस को दुह चुके थे। इसके बाद एक बड़े झरिये से दूध को छान कर खाली केन भर लिया। इसके बाद हरलाल एक बार फिर थोड़ी देर हमारे पास बैठे और बातें करते रहे। तब तक सुबह के साढ़े पांच बज गए थे। दूध सप्लाई का टाइम हो चला था। वहीं खेतों में अब कोहरा नजर आने लग गया था। विजिबिलिटी बहुत ही कम थी। 5 मीटर आगे कुछ भी नजर नहीं आ रहा था। बावजूद इसके हरलाल ने वो सभी केन अपनी बाइक में टांगे और फतेहपुर शहर के लोगों के घरों में दूध सप्लाई करने के लिए रवाना हो गए। फतेहपुर में बन चुके तापमान के कई रिकॉर्ड फतेहपुर में न्यूनतम पारा के रिकॉर्ड की बात करें तो 20 दिसंबर 2021 को -5.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था। 31 दिसंबर 2021 को तापमान -4 डिग्री चला गया था। इसके पहले 2019 में 27 दिसंबर को न्यूनतम पारा -4 डिग्री दर्ज किया गया था। मौसम विभाग ने वर्ष 1986 में सीकर में रिकॉर्ड तापमान -5.1 डिग्री दर्ज किया था। ये खबर भी पढ़ें… हफ्तेभर नहीं निकला सूरज, आग से बर्फ पिघलाकर बनाया पानी:जानिए जून में तपने वाली बालू मिट्टी, क्यों जनवरी में बर्फ बन जाती है फतेहपुर में पांचवें दिन तापमान माइनस में:पारा मानइस 2 डिग्री दर्ज, खेतों और बर्तनों में जमी बर्फ


