राजस्थान हाईकोर्ट के 43वें चीफ जस्टिस कल्पथी राजेंद्रन श्रीराम आज 25 सितंबर को अपनी 62 वर्ष की आयु पूर्ण करने पर सेवानिवृत्त हो रहे हैं। उन्होंने राजस्थान हाईकोर्ट में महज 69 दिनों का कार्यकाल पूरा किया है, जो पिछले 10 वर्षों में नियुक्त मुख्य न्यायाधीशों में तीसरा सबसे छोटा कार्यकाल है। जस्टिस श्रीराम का जन्म 28 सितंबर 1963 को मुंबई में हुआ था। उन्होंने मुंबई विश्वविद्यालय से कॉमर्स स्नातक और एलएलबी की डिग्री प्राप्त की तथा इसके बाद लंदन के किंग्स कॉलेज से समुद्री कानून में एलएलएम किया। जुलाई 1986 में उन्हें महाराष्ट्र एवं गोवा बार काउंसिल में वकील के रूप में पंजीकृत किया गया। उन्होंने 2013 में बॉम्बे हाईकोर्ट में अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में न्यायिक सेवा शुरू की और 2016 में स्थायी न्यायाधीश बने। 27 सितंबर 2024 को वे मद्रास हाईकोर्ट के 34वें मुख्य न्यायाधीश बने और 21 जुलाई 2025 को राजस्थान हाईकोर्ट के 43वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली। समुद्री कानून के विशेषज्ञ न्यायमूर्ति श्रीराम समुद्री कानून के विशेषज्ञ माने जाते हैं। उन्होंने अपने वकालत के दौरान बॉम्बे हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट, उपभोक्ता फोरम्स, सीमा शुल्क और सेवा कर अपीलीय न्यायाधिकरण, प्रतिभूति अपीलीय न्यायाधिकरण और कंपनी लॉ बोर्ड में वकालत की है। छोटा लेकिन प्रभावी कार्यकाल जस्टिस श्रीराम का राजस्थान हाईकोर्ट में कार्यकाल भले ही मात्र 69 दिनों का रहा हो, लेकिन इस दौरान उन्होंने न्यायिक प्रशासन को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनके कार्यकाल में राजस्थान हाईकोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या एक बार तो इतिहास में सर्वाधिक 43 तक पहुंची थी। दोपहर में विदाई समारोह राजस्थान हाईकोर्ट में आज दोपहर 3:45 बजे जस्टिस श्रीराम के लिए विदाई रेफरेंस का आयोजन किया जाएगा। इस समारोह में हाईकोर्ट के अन्य न्यायाधीश, वकील समुदाय और न्यायालय के कर्मचारी शामिल होंगे। राजस्थान हाईकोर्ट के सबसे कम कार्यकाल वाले मुख्य न्यायाधीश:


