राजेंद्र राठौड़ बोले-लोग सीएम बनने की बात करते थे:आज धरती पर लौट गया, व्यक्ति को बनने में वर्षों लगते हैं, मिटने में समय नहीं लगता

पूर्व नेता प्रतिपक्ष और भाजपा के वरिष्ठ नेता राजेंद्र राठौड़ ने कहा- मेरे बारे में भी बहुत से लोग कहते हैं, बहुत ऊंचाइयों पर था। प्रतिपक्ष का नेता था, मुख्यमंत्री की बात लोग करते थे, आज धरती पर लौट गया। मैं समझता हूं एक व्यक्ति को बनने में व लगते हैं, और मिटने में समय नहीं लगता। उन्होंने कहा- क्यों हम अपने ही लोगों में कमियां ढूंढने लग जाते हैं। क्या कारण रहा कि ऊंचाइयों पर पहुंचने वाले लोग यकायक ढह जाते हैं, टूट जाते हैं, मंजिल से पहले गिर जाते हैं। हमारे मन में उनके प्रति सहानुभूति नहीं होती, बल्कि उपहास करते हैं कि बड़ा नेता बनने आया था दरअसल, राठौड़ बीकानेर के श्रीडूंगरगढ़ के रघुकुल समाज में रविवार को हुए राजपूत समाज के प्रतिभा सम्मान समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे। उन्होंने अपने ही लोगों को आगे बढ़ाने के बजाय उनका उपहास करने पर चिंता जताई। सब मिलकर काम करेंगे, तभी लोकतंत्र सफल होगा
आजकल नया जमाना आ गया। पहले गांव में शादियों में बैंड बजते थे। बैंड में अलग- अलग वाद्य यंत्र होते थे। कई तरह के वाद्य एक साथ बजते तो अच्छे लगते थे। सभी वाद्य यंत्रों में एक जैसे वाद्य यंत्र की आवाज आएं तो कर्णप्रिय नहीं लगेंगे। पंचमेल की सब्जी में 5 तरह की सब्जी होती है। जब पांच सब्जियां उसमें डाली जाती है, तब जाकर पंचमेल बनती है। हम सभी मिलकर काम करेंगे, तभी ये लोकतंत्र सफल होगा। हमें सभी को साथ लेकर चलना चाहिए। जिस पैतृक भूमि से मेरा नाम जुड़ा है, हम उसे बेच देते हैं
राठौड़ ने कहा कि हम सभी में मर्यादा पुरुषोत्तम राम के वंशज होने का गर्व है। राजतंत्र और लोकतंत्र की यात्रा में हमने बहुत कुछ खोया है और पाया है। सोशल मीडिया के जमाने में रिश्ते दरकते जा रहे हैं और संयुक्त परिवार टूटता हुआ देखता हूं। पैतृक भूमि और गांव से विछोह देखता हूं, जिस धरती के लिए महाराणा प्रताप ने दुख सहे थे। राणा सांगा ने धरती के लिए युद्ध लड़ा, लेकिन आज हम इस धरती से अलग हो रहे हैं। जिस पैतृक भूमि से मेरा नाम जुड़ा है, हम उसे बेच देते हैं। ये प्रतिभाएं उच्च पदों पर पहुंचेंगे तो लोग पूछेंगे किस गांव के हो, तो बताने के लिए कुछ नहीं होगा। इन्हें कहना पड़ेगा कि वहां तो हमारे दादोसा रहते थे। तलवार शौर्य की प्रतीक, लेकिन अब कलम का जमाना
कार्यक्रम में राजपूत समाज की प्रतिभाओं का सम्मान किया गया। इस मौके पर राठौड़ को एक तलवार भेंट की गई। इस दौरान राठौड़ ने कहा- निश्चित तौर पर तलवार शौर्य का प्रतीक है, लेकिन अब कलम का जमाना है। हमें समय के साथ बदलना होगा। अब तलवार और भाला उठाने का समय नहीं है। अब सर कटाकर शासन नहीं मिलता, अब न भाला उठाना है और न तलवार उठानी है, न सर कटवाना है। अब सर गिनवाने की हिम्मत हमारे अंदर होनी चाहिए।

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