यूपी की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल को फर्जी नोटिस लखनऊ के GPO से भेजी गई थी। 11 दिसंबर को 11.58 बजे काउंटर नंबर-11 से नोटिस पोस्ट की गई। नोटिस पर मलिहाबाद तहसील के पेशकार गंगाराम के नाम से फर्जी साइन किया गया था। नोटिस पर पेन से राज्यपाल महोदय संबोधित करते हुए लिखा गया है। अधिकारियों का कहना है कि मलिहाबाद तहसील का कोई भी लेटर GPO (जनरल पोस्ट ऑफिस) से नहीं भेजा जाता है। इसे शरारत करने वाले ने हजरतगंज GPO से भेजा। SDM मलिहाबाद का कहना है कि नोटिस फर्जी है। इसे तहसीलदार ने जारी नहीं किया है। उन्होंने बताया कि वसीयत के मामले में नोटिस नहीं जारी की जाती है। इसमें इश्तहार दिया जाता है। आगे पढ़ते हैं नोटिस राज भवन कैसे पहुंची…
राज्यपाल को नोटिस भेजे जाने की जानकारी जब कलेक्ट्रेट में पहुंची तो पूरे मामले की जांच के लिए मलिहाबाद तहसील के अधिकारियों को निर्देश दिए गए। मलिहाबाद तहसील के अधिकारियों ने मुकदमे की वादी मीरा पाल को बुलाया। पूरे मामले की जानकारी ली। मीरा पाल ने कहा कि मेरा कोई वकील ही नहीं है। 9 दिसंबर को हुई थी आखिरी सुनवाई
मीरा पाल ने कहा- मुकदमे की डेट 9 दिसंबर को लगाई गई थी। जिसके बाद अगली डेट लगाई गई है। मुकदमे में ना ही कोई नोटिस की जानकारी दी गई थी और ना ही नोटिस भेजने की कोई सूचना थी। यह नोटिस कहां से पहुंची मुझे नहीं मालूम है। CCTV से पहचान की कोशिश
नोटिस भेजने का समय और स्थान की जानकारी होने के बाद प्रशासन ने जीपीओ के अधिकारियों से संपर्क किया गया। काउंटर नंबर-11 से नोटिस भेजने वाले की CCTV फुटेज से तलाश की जा रही है। प्रशासन का कहना है कि पोस्ट की टाइमिंग और डेट से यह तो क्लियर हो गया है कि नोटिस GPO से भेजी गई। तहसीलदार कोर्ट में चल रहा वरासत का मामला
तहसील मलिहाबाद में मीरा पाल बनाम ग्राम सभा का वरासत का मुकदमा तहसीलदार विकास सिंह की कोर्ट में विचाराधीन है। इस मुकदमे में राज्यपाल को पक्षकार बनाने का कोई प्रावधान नहीं है। बावजूद इसके, 11 नवंबर को राज्यपाल को पार्टी बनाते हुए फर्जी नोटिस जारी कर राजभवन भेज दिया गया। तहसीलदार विकास सिंह के अनुसार, यह नोटिस 29 अक्टूबर को जारी करने और 8 नवंबर को पेशी की तारीख के साथ तैयार किया गया। इसे हजरतगंज स्थित GPO से स्पीड पोस्ट के माध्यम से भेजा गया। केवल कंप्यूटराइज्ड नोटिस भेजे जाते हैं
जांच में पता चला कि यह नोटिस मलिहाबाद तहसील से जारी नहीं की गई है। राजस्व संहिता 2006 के तहत धारा-34 के तहत दर्ज मुकदमों में पक्षकारों को केवल कंप्यूटराइज्ड नोटिस भेजे जाते हैं। यह नोटिस सामान्य प्रारूप में तैयार किया गया था, जिस पर तहसीलदार की मुहर और उनके पेशकार के फर्जी हस्ताक्षर किए गए थे। शरारती तत्व के हाथ कैसे लगी जानकारी
प्रशासन का मानना है कि शरारती तत्व ने तहसील में दर्ज मुकदमे की जानकारी पहले से जुटाई थी। राजस्व संहिता 2006 के तहत वरासत के मामलों में सभी नोटिस कंप्यूटराइज्ड जारी होते हैं, लेकिन इस मामले में सामान्य नोटिस को आधार बनाकर छेड़छाड़ की गई। दफा 34 के तहत इश्तेहार निकाला जाता है। इसी नोटिस को क्यों चुना?
मीरापाल बनाम ग्राम सभा का मामला 24 सितंबर 2024 से विवादित है। यह मामला वरासत का होने के कारण सीधे तौर पर प्रशासनिक या राजनीतिक हस्तक्षेप में नहीं है। राजभवन को फर्जी नोटिस भेजने का उद्देश्य प्रशासन की छवि धूमिल करना हो सकता है। ऐसा लग रहा है कि आरोपी ने ध्यान अपनी ओर खींचने के लिए एक ऐसे मुकदमे को चुना, जो विवादित होते हुए भी आम जनता की नजर में साधारण है। 6 महीने से तहसीलदार कोर्ट में चल रहा मामला
मीरापाल और ग्राम सभा के बीच विवादित जमीन का वरासत मामला पिछले छह महीने से तहसीलदार की अदालत में विचाराधीन है। मीरा पाल का दावा है कि जमीन पर उनका पुश्तैनी हक है, जबकि ग्राम सभा इसे खारिज करती रही है। मीरापाल ने कहा, हम न्याय की उम्मीद में तहसील के चक्कर काट रहे हैं। इस मामले को गलत तरीके से प्रचारित करना हमारी छवि खराब करने का प्रयास है। शरारती तत्व ने ऐसा क्यों किया?
तहसील सूत्रों की मानें तो यह साजिश प्रशासन की छवि खराब करने और राजभवन का ध्यान अपनी ओर खींचने के लिए की गई है। एक अन्य संभावना यह भी है कि इस विवादित मामले में पक्षकारों पर दबाव बनाने का प्रयास हो सकता है। तहसीलदार विकास सिंह ने कहा, यह हरकत प्रशासनिक व्यवस्था को चुनौती देने की कोशिश है। दोषियों को जल्द ही चिन्हित कर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। क्या हो सकती है कार्रवाई?
फर्जी दस्तावेज तैयार करने और सरकारी मुहर का दुरुपयोग करने के आरोप में मामला दर्ज किया जाएगा। इस मामले में भारतीय न्याय संहिता के अनुसार धोखाधड़ी से जुड़ी धाराएं लगाई जा सकती हैं। यह भी पढ़ें मलिहाबाद तहसीलदार ने भेजा राज्यपाल को नोटिस:राजभवन की आपत्ति पर कलेक्ट्रेट में हड़कंप, तहसीलदार बोले- किसी ने शरारत की लखनऊ के मलिहाबाद तहसील से उत्तर प्रदेश की राज्यपाल के नाम एक नोटिस भेजा गया है। 11 दिसंबर को स्पीड पोस्ट के जरिए पहुंची नोटिस पर राज भवन ने कड़ी आपत्ति जताई है। साथ ही संबंधित अधिकारियों, कर्मचारियों पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। पढ़ें पूरी खबर…


