राज्य मंत्री बोले- वंदे भारत ट्रेनें, बुलेट ट्रेनें ही हैं:हमने जापान को पीछे छोड़ दिया, अब जर्मनी को भी पीछे छोड़ने वाले

राज्य मंत्री केके विश्नोई ने मंगलवार को लघु उद्योग भारती भवन में भारतीय जनता पार्टी की ओर से हुए प्रबुद्धजन सम्मेलन को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने बताया- एक हिंदी गाना पहले फिल्मों में चला करता था। इसका टाइटल था। ‘मेरा जूता है जापानी पतलून इंग्लिशतानी, सर पर रूसी टोपी फिर भी दिल है हिंदुस्तानी’। यानी सिर्फ हमारा दिल हिंदुस्तानी था, लेकिन माल सब बाहर का था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा सरकार बनने के बाद मेक इन इंडिया को बढ़ावा दिया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पहले कार्यकाल का जिक्र किया। कहा- उस समय क्या खुशी का माहौल था। देश में जापान के साथ दो बुलेट ट्रेन का सौदा हुआ। यह वंदे भारत ट्रेनें, बुलेट ट्रेनें ही है। एक समय था जब जापान के जूतों का आकर्षण था, लेकिन अब हमने जापान को पीछे छोड़ दिया है। अब हम जर्मनी को भी पीछे छोड़ने वाले हैं। अब पासपोर्ट को मिलता सम्मान पहले विदेश की धरती पर इमिग्रेशन के अधिकारी विदेशी पासपोर्ट के सामने देखते तक नहीं थे, लेकिन अब इंडियन पासपोर्ट को देखकर उसका मन करता है कि खड़ा होकर वेलकम करूं। केजरीवाल पर खड़े किए सवाल उन्होंने कहा- मात्र 100 यूनिट बिजली सस्ती करने के नाम पर केजरीवाल 10 साल सरकार बनाकर बैठ गया। लेकिन पीएम मोदी ने देश को विकसित बनाने के लिए GST लागू किया। आज उसका सरलीकरण किया। ये इतना बड़ा कदम है। पूर्व में जो प्रधानमंत्री आवास बने उनसे भी बड़ा आंकड़ा छूट में मिल गया। जितनी किसान सम्मान निधि दी गई है, उनसे भी बड़ा आंकड़ा छूट में चला जाएगा। इसलिए 100 यूनिट की मुफ्त बिजली के नाम पर जो दस साल तक दिल्ली जैसे राज्य में सरकार बनाकर चला गया। अपने को अंदाजा लगाने की जरूरत है, आज हर प्रोडक्ट सस्ता हो चुका है। केके विश्नोई ने मीडिया से बात करते हुए कहा- आम आदमी की सेवा करना हर जनप्रतिनिधि का धर्म है, लेकिन गलत तरीके से बातें कर लोगों को बेवकूफ बनाकर सत्ता की कुर्सी पर बैठ जाना गलत है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में कई बार लोग जाती, गोत्र या स्थानीय मुद्दे पर मन विचलित कर देता है, लेकिन उसे सोच समझकर वोट डालना चाहिए। केके विश्नोई ने कहा- पीएम मोदी ने 2047 तक विकसित भारत को सोच को लेकर GST रिफॉर्म किया। इस समय GST लाई गई थी, उस समय विपक्षी साथियों ने विरोध किया, लेकिन इससे कई सारे टैक्स की उलझन से मुक्ति मिली।

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