झारखंड में खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) अभियान की स्थिति चिंताजनक है। सरकार द्वारा निर्धारित लक्ष्य के मुकाबले राज्य में सिर्फ 25% ही कार्य पूरा हो सका है। इस 25 फीसदी कार्य के लिए एमआईएस में की गई प्रविष्टि भी संदेह के घेरे में है। स्वच्छ भारत मिशन के राज्य समन्वयक नितिन कुमार ने भी स्वीकार किया है कि लक्ष्य के विरुद्ध उपलब्धि महज एक चौथाई ही है। स्टेट कोऑर्डिनेटर शुक्रवार को जिले में ओडीएफ की स्थिति का जायता लेने हजारीबाग आए हुए थे। इस मामले पर उन्होंने कहा कि राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन ने ओडीएफ अभियान को सफल बनाने के लिए कई योजनाएं चलाईं, लेकिन ज़मीनी स्तर पर इसका असर उम्मीद के मुताबिक नहीं दिखा। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में शौचालय निर्माण की धीमी गति, फंडिंग की कमी और जनजागरूकता की कमी इसके प्रमुख कारण हैं। कहा कि कई जिलों में शौचालय तो बनाए गए हैं, लेकिन वे उपयोग में नहीं आ रहे हैं या अधूरे पड़े हैं। इसके अलावा, ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों की सोच में बदलाव लाना भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। सबसे बड़ी बात यह है कि झारखण्ड के सभी ज़िलों में ओडीएफ निर्माण की धीमी गति चिंता का विषय है। इधर स्वच्छता अभियान की धीमी गति को लेकर विपक्षी दलों ने सरकार पर निशाना साधा है। उनका कहना है कि सरकार केवल आंकड़ों की बाजीगरी कर रही है, जबकि जमीनी हकीकत कुछ और ही है। झारखंड में गांवों की संख्या 3262 है। इन सभी गांवों को ओडीएफ फ्री करने के लिए एक अभियान चलाया गया था। 2 अक्टूबर 2019 से इसकी शुरुआत हुई थी। इन सभी गांवों में 12500 रुपए की लागत से एक-एक शौचालय का निर्माण करना था। गांवों को खुले में शौच से मुक्त करने के लिए यह अभियान शुरू किया गया था। हजारीबाग के सिंदूर में बन रहा प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट यूनिट हजारीबाग के सिंदूर इलाके में एक नया प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट यूनिट स्थापित की जा रही है। यह इकाई राज्य में पर्यावरणीय समस्याओं को कम करने और प्लास्टिक कचरे के उचित निपटान में मदद करेगी। झारखंड में ऐसे कुल 60 प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट यूनिट बनाए जा रहे हैं, जिससे राज्य को स्वच्छ और प्लास्टिक मुक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया जा रहा है। स्वच्छता विभाग के स्टेट को-ऑर्डिनेटर नितिन कुमार ने बताया कि ये यूनिट प्लास्टिक कचरे को रिसाइकिल करके प्रदूषण को कम करेंगी और जल, मिट्टी व वायु को स्वच्छ बनाए रखेंगी। इस पहल से स्थानीय लोगों के लिए रोज़गार के नए अवसर उपलब्ध होंगे, जिससे उनकी आजीविका में सुधार होगा। इस यूनिट्स से स्वच्छ भारत मिशन को मजबूती मिलेगी और सार्वजनिक स्थलों पर प्लास्टिक कचरा कम होगा। साथ ही प्लास्टिक कचरे को रिसाइकिल कर इको-फ्रेंडली उत्पादों में बदला जाएगा, जिससे प्राकृतिक संसाधनों की खपत भी कम होगी। सभी घरों के पास बड़ा रखा जाएगा लोगों से अपील की जाएगी कि वे प्लास्टिक के कचरे इन बोरों में रखें, फिर वहां से इसे उठा लिया जाएगा। बताया कि यह यूनिट नगर निगम और ग्राम पंचायतों को प्लास्टिक कचरे के प्रभावी प्रबंधन में सहयोग देंगी। प्लास्टिक वेस्ट को रिसाइकिल कर नई ऊर्जा स्रोतों के रूप में उपयोग किया जा सकता है। वेस्टेज प्लास्टिक का उपयोग सड़क निर्माण के अलावा अन्य चीजों में किया जाता है। ज्ञात हो कि हजारीबाग के सिंदूर समेत झारखंड के विभिन्न हिस्सों में स्थापित होने वाली ये यूनिट्स पर्यावरण संरक्षण, रोजगार सृजन और स्वच्छता के लिहाज से उपयोगी साबित होगी। मिशन से जुड़े कर्मियों को नवंबर माह से वेतन नहीं यह एक विडंबना है कि स्वच्छ भारत मिशन से जुड़े कर्मियों को नवंबर माह से वेतन नहीं मिला है। वेतन नहीं मिलने की स्थिति में ये इस अभियान को कितना गति दे पाएंगे यह समझ की बात है। जिले में कार्यरत समन्वयकों का कहना है कि आवंटन के अभाव में पिछले चार माह से वेतन नहीं मिला है।


